दिल्ली विद्यापीठ से गोल्ड मेडल प्राप्त शिमला के ज्योतिषाचार्य आचार्य तारा दत्त शर्मा ने कहा कि पंचांग के अनुसार कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास में अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इस बार पंचांग के अनुसार अष्टमी की तिथि 11 अगस्त को सुबह 9 बजकर 6 मिनट से आरंभ हो रही है।
अष्टमी तिथि 12 अगस्त को सुबह 11 बजकर 16 मिनट पर समाप्त हो रही है। 11 अगस्त को भरणी और 12 अगस्त को कृतिका नक्षत्र हैं। इसके बाद रोहिणी नक्षत्र आता है जो 13 अगस्त को रहेगा। इसीलिए कुछ स्थानों पर इस दिन भी जन्माष्टमी का पर्व मनाया जा रहा है। लेकिन अष्टमी तिथि 12 अगस्त को प्रात: 11 बजकर 16 मिनट तक है। इसलिए गृहस्थ को इस व्रत का पूजन 11 अगस्त की रात्रि को करना चाहिए।