हिमाचल प्रदेश के अधिकांश 60 वर्ष से अधिक आयु के महिला और पुरुष आज भी अपने परिवार के साथ बैठकर चूल्हे की आग के सामने पुराने किस्से दोहराते हैं। 92 फीसदी वरिष्ठ नागरिक ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं। शहरों में नौकरी करने के बाद भी अधिकांश बुजुर्ग अपने मूल क्षेत्रों का रुख करते हैं। हिमाचल में एक सामाजिक विश्वास है कि माता-पिता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। यही वजह है कि यहां के लोग वृद्ध माता पिता को बोझ नहीं समझते। 21 अगस्त को हर साल वरिष्ठ नागरिक दिवस के अवसर पर जब देश भर में बुजुर्गों को सम्मान देने और उनके योगदान को याद करने की परंपरा निभाई जाती है, वहीं हिमाचल की कहानी बताती है कि यहां किस प्रकार से संस्कारों और संवेदनाओं से बुजुगों को सहेजना ही सच्ची सामाजिक सुरक्षा है।
यहां की प्राकृतिक आबोहवा, शुद्ध खानपान और संतुलित जीवनशैली ने प्रदेश के बुजुर्गों को लंबा, स्वस्थ और सक्रिय जीवन जीने का अवसर दिया है। यहां के लोग 90 से 100 वर्ष तक की उम्र तक स्वस्थ जीवन जीते हैं और कई तो 100 पार भी कर चुके हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में प्रदूषण कम है, जिससे सांस की बीमारियां बहुत कम देखने को मिलती हैं। ताजे फल-सब्जियां, देसी घी, घर का बना दही और दूध नियमित आहार का हिस्सा होते हैं। अधिकांश बुजुर्ग आज भी खेतों में हल चलाते, मवेशियों की देखभाल करते और घर के छोटे-मोटे काम खुद करते दिखते हैं। यह नियमित शारीरिक गतिविधि उनके शरीर को चुस्त-दुरुस्त बनाए रखती है।
4,000 से अधिक बुजुर्ग पार कर रहे सौ साल की आयु
प्रदेश में 4,000 से अधिक बुजुर्ग 100 साल की आयु का आंकड़ा भी पार रहे हैं। किन्नौर के श्याम शरण नेगी देश के पहले मतदाता के तौर पर विख्यात रहे हैं। नवंबर 2022 में 105 वर्ष की आयु में इनका निधन हुआ था। 1951 से 2022 तक नेगी ने लगातार 34वां बोट डाला था। पूर्व डीजीपी 92 वर्षीय आरआर वर्मा आज भी रोजाना माल रोड शिमला की सैर करते हैं। 15 अगस्त को आरआर वर्मा ने रिज मैदान पर पहाड़ी नाटी कर सबका मन मोह लिया।