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विश्व स्वास्थ्य दिवस विशेष: कोरोना से मिली स्वास्थ्य विभाग को ऑक्सीजन पर वीआईपी अभी भी बाहर ही कराते हैं उपचार

Thu, 07 Apr 2022 10:25 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

कोरोना से स्वास्थ्य विभाग को ऑक्सीजन मिली है। कोरोना काल के दो वर्षों में मेडिकल कॉलेजों के अलावा जोनल और सिविल अस्पतालों का आधारभूत ढांचा विकसित हुआ है। हालांकि इसके बावजूद अभी भी वीआईपी लोग प्रदेश के अस्पतालों के बजाय बाहरी राज्यों के बड़े अस्पतालों में उपचार कराने को ही तवज्जो दे रहे हैं। 
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ऑक्सीजन (सांकेतिक) - फोटो : iStock
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश में कोरोना से स्वास्थ्य विभाग को ऑक्सीजन मिली है। कोरोना काल के दो वर्षों में मेडिकल कॉलेजों के अलावा जोनल और सिविल अस्पतालों का आधारभूत ढांचा विकसित हुआ है। हालांकि इसके बावजूद अभी भी वीआईपी लोग प्रदेश के अस्पतालों के बजाय बाहरी राज्यों के बड़े अस्पतालों में उपचार कराने को ही तवज्जो दे रहे हैं। इन्हें स्वास्थ्य विभाग की ओर से उपलब्ध करवाई जा रही चिकित्सा सुविधा पर भरोसा नहीं है। वीआईपी प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में रूटीन चेकअप के लिए आते हैं, लेकिन इलाज करवाने के लिए एम्स, पीजीआई, अपोलो और बड़े निजी चिकित्सा संस्थानों का रुख करते हैं। कोरोना से पहले प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में मात्र चार ऑक्सीजन प्लांट थे। कोरोना के विकराल रूप धारण करने पर प्रदेश में ऑक्सीजन की मांग बढ़ी। ऐसे में सरकार को आनन-फानन में ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करने पड़े।

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इसलिए प्रदेश मेें अब इनकी संख्या 49 हो गई है। यही नहीं, हिमाचल प्रदेश बाहरी राज्यों के अस्पतालों ऑक्सीजन की आपूर्ति कर रहा है। वेंटिलेटर भी 112 से बढ़ाकर 1114 हो गए हैं। गंभीर मरीजों को पहले वेंटिलेटर नहीं मिलते थे, अब मरीज की स्थिति बिगड़ते ही उन्हें तुरंत वेंटिलेटर की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। राज्य में 200 से ज्यादा बेड ऑक्सीजन से जोड़ दिए गए हैं। बेड की संख्या में भी इजाफा हुआ है। प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों, जोनल और सिविल अस्पतालों में पहले मात्र 452 बिस्तर की ही सुविधा थी। मरीजों को बिस्तर न मिलने पर उनका उपचार स्ट्रेचर पर होता था। अब अस्पतालों मेें 8000 बिस्तर हैं। इसी तरह प्रदेश के अस्पतालों में 2500 डाक्टर सेवाएं दे रहे हैं। पहले इनकी संख्या 834 थी। नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ की भी 400 से ज्यादा भर्तियां की गई हैं। 

राज्य में स्वास्थ्य के क्षेत्र में आधारभूत ढांचा विकसित हुआ है। मेडिकल कॉलेजों में मरीजों के लिए हर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध है। तमाम स्वास्थ्य केंद्रों में उपकरण सहित पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध है। घर-द्वार मरीजों के टेस्ट किए जा रहे हैं। 

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- अमिताभ अवस्थी, स्वास्थ्य सचिव  

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