हिमाचल में महिलाएं अब चूल्हा चौंका छोड़कर दफ्तरों की राह पकड़ रही हैं। वे प्रदेश की अर्थव्यवस्था सुधारने में अहम योगदान दे रही हैं। पिछले सात वर्षों में राज्य में कामकाजी महिलाओं की संख्या में चार गुना से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
हिमाचल प्रदेश के छठवें आर्थिक सर्वेक्षण की प्राथमिक रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। मार्च 2015 में इसकी फाइनल रिपोर्ट प्रकाशित की जाएगी। इससे पहले 2005 में यह रिपोर्ट प्रकाशित की गई थी।
रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में निजी क्षेत्र में काम करने वालों की संख्या 9,61,646 है। इसमें से 75.21 फीसदी पुरुष हैं, जबकि 24.79 प्रतिशत महिलाएं हैं।
खुद भी चला रहीं कारोबार
2005 के सर्वे के मुताबिक कामकाजी महिलाओं की संख्या महज छह प्रतिशत के आसपास थी। इससे पता चलता है कि हिमाचल में महिलाओं की आत्मनिर्भरता बढ़ी है। महिलाएं अपने दम पर आगे बढ़ रही हैं। इसमें से 16.02 प्रतिशत महिलाएं दफ्तरों में काम रही हैं, जबकि आठ फीसदी महिलाएं खुद का कारोबार चला रही हैं।
हिमाचल के श्रमिकों पर एक नजर
कुल श्रमिक----------------961646
ग्रामीण क्षेत्र में-------------729635
शहरी क्षेत्र में---------------232011
हायर श्रमिक---------------560435
नन हायर श्रमिक----------401211
किस जिले में सबसे अधिक काम?
प्रदेश के कांगड़ा जिले में श्रमिकों के लिए सबसे अधिक काम है। यहां सबसे अधिक 19.81 फीसदी श्रमिक कामकाज से जुड़े हैं, जबकि प्रदेश का औद्योगिक जिला सोलन दूसरे नंबर पर है। यहां 16.80 प्रतिशत ही निजी क्षेत्र के कामकाज से जुड़े हैं। तीसरे नंबर पर मंडी है, जहां 11.52 फीसदी श्रमिक हैं। ये तीन ऐसे जिले हैं, जहां पर सबसे अधिक रोजगार के संसाधन उपलब्ध हैं।
हिमाचल के आर्थिक सलाहकार प्रदीप चौहान का कहना है कि सात साल बाद प्रदेश के आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट सामने आई है। इसमें महिलाओं का काम करने का ग्राफ बढ़ा है। प्रदेश की महिलाएं अर्थव्यवस्था से जुड़ रही हैं।