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Shimla News: मैथीनेशन प्लांट का काम शुरू, कचरे से तैयार होगी ज्यादा बिजली

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नागपुर की कंपनी देश का पहला बायोमैथीनेशन प्लांट का कर रही निर्माण, 12 करोड़ रुपये होंगे खर्च
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प्लांट में गीले कचरे से बनेगी मैथेन, गैस से बिजली बनाने की बढ़ेगी क्षमता
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में घरों से रोजाना निकलने वाले कचरे से अब पहले से ज्यादा बिजली तैयार होगी। इसके लिए शहर के भरयाल में बायो मैथीनेशन प्लांट लगाने का काम शुरू हो गया है। नागपुर की एक कंपनी को इस प्लांट को स्थापित करने का जिम्मा दिया गया है।
यह देश का पहला बायोमैथीनेशन प्लांट होगा। इसमें कचरे से पहले मैथेन गैस तैयार होगी। इसके बाद इस गैस का इस्तेमाल कचरे से बिजली बनाने की क्षमता बढ़ाने में किया जाएगा। इस प्लांट की लागत करीब 12 करोड़ रुपये रहेगी। नगर निगम के अनुसार शिमला शहर से रोजाना 70 से 90 टन कचरा निकलता है। इस कचरे का भरयाल कूड़ा संयंत्र में निपटारा किया जाता है। यहां कचरे से बिजली तैयार की जा रही है। हालांकि, अभी कचरे से बिजली बनाने का काम बेहद कम है। इसका कारण गीला कचरा ज्यादा होना है। कचरे से बिजली बनाने के लिए इसका सूखा होना जरूरी है। इसीलिए अब ऐसा प्लांट तैयार किया जा रहा है जिसमें गीले कचरे से पहले मैथेन गैस बनेगी। इसके बाद इसे ब्लेंड कर कचरे से बिजली उत्पादन की क्षमता बढ़ाने में इस्तेमाल किया जाएगा। नगर निगम के प्रोजेक्ट निदेशक धीरज चंदेल ने कहा कि भरयाल में बायोमैथीनेशन प्लांट का निर्माणकार्य शुरू कर दिया गया है। एक साल के भीतर यह प्लांट बनकर तैयार हो जाएगा।
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कचरे से बिजली बनाने वाला भी पहला संयंत्र
भरयाल में ही कचरे से बिजली बनाने वाला प्रदेश का पहला संयंत्र स्थापित किया है। इसे ऑस्ट्रेलियन नागरिक ने अपने खर्च पर स्थापित किया है। नगर निगम ने सिर्फ इसे जगह मुहैया करवाई थी। हालांकि, संयंत्र को शुरू करने में पांच साल से ज्यादा वक्त लग गया। लेकिन अब यह काम कर रहा है। शहर के अलावा साथ लगते साडा इलाकों का कचरा भी अब भरयाल पहुंचता है। आने वाले समय में निगम सोलन नगर निगम से भी कचरा लेकर बिजली बनाने में इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है।
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