अमर उजाला से रितिका जिंदल ने कहा कि अष्टमी के दिन हम महिलाओं के सम्मान की बात तो करते हैं, लेकिन उन्हें उन्हीं के अधिकारों से वंचित रखा जाता है। उन्होंने बताया कि वह सुबह मंदिर में व्यवस्थाओं का जायजा लेने गई थीं। मंदिर में महिलाओं के प्रवेश और पूजा करने पर कोई रोक नहीं है, लेकिन वहां हवन चल रहा था।
उन्होंने वहां मौजूद लोगों से हवन में भाग लेने का आग्रह किया, लेकिन वहां मौजूद लोगों ने उन्हें साफ मना कर दिया और कहा कि जबसे मंदिर में हवन हो रहा है, तबसे किसी भी महिला को हवन में बैठने का अधिकार नहीं है।
इस मानसिकता को देखकर उन्हें भारी धक्का लगा और उन्होंने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि सभी महिलाओं को ऐसी विचारधारा बदलने की आवश्यकता है और इसे वे तभी बदल सकती हैं, जब वे इस रूढ़िवादी सोच का विरोध करेंगी। उन्होंने कहा कि मैं एक अधिकारी बाद में हूं, महिला पहले हूं। महिला होने के नाते ही उन्होंने यह लड़ाई लड़ी है। यह अधिकार हर महिला को मिलना चाहिए।