केएनएच में ओपीडी के बाहर लगी मरीजों की भीड़।
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कमला नेहरू अस्पताल से गायनी ओपीडी को इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज में शिफ्ट करने के दो माह बाद भी महिलाओं की परेशानियां कम नहीं हो रही हैं। महिलाओं को केएनएच में ओबीजी की पर्ची बनाने के बाद गायनी उपचार के लिए आईजीएमसी जाना पड़ता है। दरअसल महिलाओं को यह पता नहीं होता उनका किस विभाग में उपचार होना है। सोमवार को भी कमला नेहरू अस्पताल में आठ ऐसी महिलाएं उपचार के लिए पहुंचीं थीं जिन्होंने ओबीजी की पर्ची बनवाई थी लेकिन उपचार उनका गायनी का होना था। 25-30 ऐसी महिलाएं हर रोज केएनएच आती हैं जिन्हें उपचार के लिए आईजीएमसी भेजा जा रहा है। इस कारण महिलाएं काफी परेशान हैं।
महिला मरीजों को समझ नहीं आ रहा है कि वह उपचार करवाने के लिए केएनएच जाएं या फिर आईजीएमसी। ऐसे में महिलाएं दोनों अस्पतालों के चक्कर काट रही हैं और इधर-उधर धक्के खा रही हैं। सोमवार को 12 महिलाओं को पर्ची काउंटर से आईजीएमसी भेजा गया। इसके अलावा सोमवार होने के कारण अस्पताल में भीड़ भी थी। पर्ची काउंटर से करीब 121 ओबीजी विभाग की पर्ची बनाई गई। भीड़ होने के कारण देर शाम तक मरीज ओपीडी के बाहर कतार में लगे रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि गायनी और ओबीजी विभाग को अलग-अलग करना गलत है क्योंकि दोनों विभाग एक-दूसरे की पूरक हैं। कोई गर्भवती महिला गर्भ धारण करती है तो वह महिला आईजीएमसी जाती है। गर्भधारण के तीन महीने तक महिला का आईजीएमसी में जांच होती है और चौथे महीने से कमला नेहरू अस्पताल में ओबीजी विभाग में उनका उपचार होगा। इसी बीच कई महिलाओं को जब कोई परेशानी आती है तो फिर उसे आईजीएमसी में धक्के खाने पड़ रहे हैं। इससे महिलाएं काफी समस्या झेल रही हैं।