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Shimla News: हाथों से बनाए उत्पाद अब विदेश में बेच सकेंगी महिलाएं

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जिले में 5500 स्वयं सहायता समूह हैं पंजीकृत, समहों को एक्सपोर्ट काउंसिल में पंजीकरण के लिए तैयार करेगा प्रशासन
प्रमाण पत्र के बाद महिलाएं विदेशों में बेच सकेंगी उत्पाद
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। जिला शिमला के स्वयं सहायता समूह की हजारों महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पाद अब विदेशों तक पहुंचेंगे। इससे न सिर्फ हिमाचली उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा बल्कि स्वयं सहायता समूहों की हजारों महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन सकेंगी। इस काम में जिला प्रशासन स्वयं सहायता समूहों की मदद करेगा।

इसके लिए स्वयं सहायता समूहों को एक्सपोर्ट काउंसिल में पंजीकरण करवाना होगा। पंजीकरण के बाद महिलाएं अपने उत्पाद विदेशों में बेच सकेंगी। महिला समूहों को इस पंजीकरण के लिए जिला प्रशासन प्रोत्साहित करेगा। प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों को इसकी पूरी प्रक्रिया समझाई जाएगी। केंद्र सरकार की एक्सपोर्ट काउंसिल विभिन्न उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए काम करती है। यह निर्यातकों का मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और बाजार की जानकारी मुहैया करवाती है। पंजीकरण के बाद एक्सपोर्ट काउंसिल प्रमाण पत्र जारी करती है जिसके बाद निर्यातक अपने उत्पाद को देश से बाहर बेच सकता है। जिला शिमला में अभी करीब 5500 स्वयं सहायता समूह पंजीकृत हैं। इनसे करीब 32 हजार परिवार जुड़े हुए हैं। इनमें ज्यादातर महिलाएं हैं जो अपने हाथों के बनाए उत्पाद तैयार कर बेच रही हैं। फूड प्रोसेसिंग, हैंडलूम, हैंडीक्राफ्ट और हर्बल उत्पाद इन स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से बनाए जा रहे हैं। अभी यह उत्पाद प्रदेश के अलावा देश के कई शहरों में बिक रहे हैं। इनकी आनलाइन बिक्री भी अब शुरू हो चुकी है। इससे महिलाओं की कमाई बढ़ी है।
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महिलाएं तैयार कर रही यह उत्पाद
जिले के स्वयं सहायता समूह आचार, चटनी, जैम, दाल, लाल चावल, शहद, मसालों, सेब की बर्फी, जौ का आटा, चीड़ के पत्तों के उत्पाद, जूट के बैग, स्टफ टायॅज, शाॅल, गर्म कपड़े, बुनाई से बने उत्पाद तैयार कर रही हैं। उपायुक्त अनुपम कश्यप ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों को इसके लिए जागरूक किया जा रहा है। जिला में हजारों परिवार इनसे जुड़े हैं। जिला प्रशासन इस काम में समूहों की मदद करेगा।
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