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Shimla News: तानचोई जामावर साड़ी के डिजाइन की कायल हुईं महिलाएं

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रिज पर चल रही हथकरघा प्रदर्शनी में खूब हो रही है बिक्री, साड़ी पर हाथों से की गई है कढाई
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छह हजार से लेकर पंद्रह हजार रुपये तक है कीमत
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। रिज मैदान स्थित पद्मदेव कांप्लेक्स में चल रही हथकरघा प्रदर्शनी में खड्डी पर बुनी तानचोई जामावर साड़ी की महिलाएं कायल हो गई हैं। इसमें हाथों से की गई कढाई और धागों का प्रयोग महिलाओं को खूब पसंद आ रहा है।
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प्रदर्शनी में इसका मूल्य 6,000 से लेकर 15,000 रुपये तक रखा है। तानचोई जामावर साड़ी एक बहुत ही महीन बुनाई वाली बनारसी साड़ियां हैं जिनमें नाजुक डिजाइन बनाने के लिए एक अतिरिक्त कतान के धागे (शुद्ध रेशम के धागे होते हैं) का इस्तेमाल किया जाता है। माना जाता है कि इस कला की उत्पत्ति चीन में हुई थी और इसे तीन चीनी भाइयों द्वारा भारत लाया था। इसका उपनाम चोई था। इसलिए इस कला का नाम तानचोई पड़ा। स्टॉल संचालक एवं कारीगर हासिर कमर ने बताया कि देशभर में इस साड़ी की खूब मांग है। इसे बनाने में समय बहुत ज्यादा लगता है इसलिए इसका मूल्य भी ज्यादा है। उन्होंने बताया कि जामावर की एक साड़ी को तीन लोगों द्वारा बनाया जाता है। एक बड़ी साड़ी को तैयार करने में 45 से 50 दिन का समय लगता है। जामावर और तनचोई दोनों ही पारंपरिक साटन बुनाई तकनीकें हैं। इसके अलावा स्टॉल पर टसर, मलबेरी, कतान और कॉटन सिल्क के सूट भी मौजूद हैं। इनका मूल्य 2000 से 4000 रुपये तक है। हासिर ने बताया कि इनके परिवार में पुश्तों से यही काम किया जाता है। अब बनारस में इनकी फेमको हैंडलूम कोआपरेटिव नाम से एक सोसायटी है। इसमें 13 करीगर जुड़े हैं। यह अपने सभी उत्पादों को प्रदर्शियनों के माध्यम से ही बेचते हैं।
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