कोल्ड स्टोरों के अभाव में हिमाचल का सेब अब न तो सड़कों पर खराब होगा और न ही बागवानों को इसे आनन-फानन में बेचने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
सेब को कोल्ड स्टोरों में रखने के लिए न कंपनियों की जी हुजूरी करनी पड़ेगी और न ही पैसे चुकाने होंगे। प्रदेश में जल्द ही दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) की मदद से सेब बहुल इलाकों में ऐसे कोल्ड स्टोर बनाए जाएंगे, जिन्हें बिजली की भी जरूरत नहीं होगी।
खास यह है कि बिना बिजली के इन कोल्ड स्टोरों का संचालन खुद बागवान करेंगे। संचालन को बागवानों की समिति बनेगी, जो कोल्ड स्टोर की दरें भी तय करेगी। पहले चरण में शिमला जिले के चार स्थानों पर ऐसे कोल्ड स्टोर बनाए जा रहे हैं।
जीरो एनर्जी कोल्ड स्टोरेज विद्आउट इलेक्ट्रिसिटी प्रोजेक्ट
नौणी विवि सोलन के जीरो एनर्जी कोल्ड स्टोरेज विद्आउट इलेक्ट्रिसिटी प्रोजेक्ट के तहत बनने वाले इन कोल्ड स्टोरों को सार्क ने स्वीकृति दे दी है। कुल 1.56 करोड़ के इस प्रोजेक्ट की पहली किश्त के रूप में 80.76 लाख रुपये जारी कर दिए हैं।
पहले चरण में शिमला के रोहड़ू, देवीधार,दलगांव एवं रामपुर के दलोग में ये स्टोर बनेंगे। यह प्रयोग सफल रहा तो सेब उत्पादक क्षेत्रों में पंचायतों के कलस्टर स्तर पर ऐसे कोल्ड स्टोर स्थापित होंगे।
जीरो एनर्जी तकनीक से बनेंगे कोल्ड स्टोर
जीरो एनर्जी तकनीक से बनने वाले ये कोल्ड स्टोर विंड एनर्जी के सिद्धांत पर चलेंगे। इनका इस तरह डिजाइन होगा, जिससे हवा का दबाव नियमित तौर पर एक समान रहे। इनमें 4 से 6 डिग्री तक तापमान रहेगा।
चार माह तक सेब या अन्य फल इसमें महफूज रहेंगे। एक स्टोर में 10 ट्रक तक सेब रखा जा सकेगा। एक कोल्ड स्टोर बनाने में 38 लाख खर्च आएगा।
हिमाचल में चार हजार करोड़ का सेब कारोबार
हिमाचल में सालाना 4000 करोड़ का सेब कारोबार होता है। सूबे में 1 लाख 22 हजार हेक्टेयर भूमि पर सेब उगाया जा रहा है। करीब छह लाख परिवार सेब उत्पादन से जुड़े हैं।
उद्यानिकी एवं वानिकी विवि नौणी के कुलपति डा. विजय सिंह ठाकुर ने बताया कि हाल में ही सार्क की टीम ने दौरा करके कोल्ड स्टोरों के लिए साइटें चिह्नित की हैं।
शिमला जिला में चार कोल्ड स्टोर बनाए जा रहे हैं। पहली किश्त मिल गई है। दूसरे चरण में चंबा और कुल्लू जिलों में ऐसे कोल्ड स्टोर बनेंगे।