हिमाचल प्रदेश में 1 अप्रैल 2025 से नई बिजली दरें तय करने से पहले आज जनसुनवाई हो रही है। राज्य विद्युत विनियामक आयोग घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं की आपत्तियों को सुनेगा। प्रदेश में क्लास वन और टू स्तर के अधिकारियों की सब्सिडी बंद करने के फैसले से इस साल प्रदेश में घरेलू बिजली दरें बढ़ने के आसार कम हैं। व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ता भी दरों को नहीं बढ़ाने की लगातार पैरवी कर रहे हैं। आज आयोग के कसुम्पटी स्थित कार्यालय में भी यह उपभोक्ता अपना पक्ष रखेंगे। जनसुनवाई के बाद आयोग नई दरों को मार्च में घोषित करेगा।
1 जनवरी से क्लास वन और टू स्तर के अधिकारियों की बिजली सब्सिडी बंद करने के फैसले के बाद सरकार ने दरों में बढ़ोतरी नहीं करने का फैसला लिया है। सरकार ने स्वेच्छा के आधार पर भी बिजली सब्सिडी छोड़ने की लोगों से अपील की है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने स्वयं बीते दिनों अपने पांच बिजली मीटरों पर मिलने वाली सब्सिडी छोड़कर इसकी शुरुआत की है। 1 अप्रैल 2025 से बिजली दरों को नहीं बढ़ाने का आग्रह करते हुए बिजली बोर्ड ने बीते दिनों ही राज्य विद्युत विनियामक आयोग में रिव्यू याचिका दायर की है। इससे पहले बोर्ड ने करीब 300 करोड़ रुपये के घाटे का हवाला देते हुए 70 पैसे प्रति यूनिट तक बिजली दरों में बढ़ोतरी करने का प्रस्ताव आयोग को सौंपा था। ऊर्जा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री ने अप्रैल 2025 से बिजली दरों में बढ़ोतरी नहीं करने को कहा है।
बिजली सब्सिडी बंद होने से महंगी बिजली का बोझ उपभोक्ताओं पर न पड़े, इसके लिए मुख्यमंत्री ने यह फैसला लिया है। सब्सिडी बंद होने के बाद उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट एक से साढ़े तीन रुपये तक महंगी बिजली मिलेगी। इसके चलते ही सरकार दरों में और बढ़ोतरी नहीं चाह रही है। बिजली बोर्ड को आर्थिक तौर पर मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री ने बीते दिनों ही बोर्ड को 100 करोड़ रुपये का कॉर्पस फंड भी दिया है। ऐसे में अब सरकार ने दरों में बढ़ोतरी नहीं करने का फैसला लिया है। उधर, क्लास वन और टू स्तर के प्रदेश सरकार, केंद्र सरकार और मिलिट्री व पैरा मिलिट्री के अधिकारियों की सब्सिडी को सरकार ने बंद कर दिया है। फरवरी में इन उपभोक्ताओं को बिना सब्सिडी की दरों वाले बिजली बिल आएंगे। हालांकि व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए नई बिजली दरें तय हो सकती हैं।