शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन अवैध पेड़ कटान पर विपक्ष का निशाना बने वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी चौतरफा घिर गए। विपक्षी दल भाजपा के विधायकों की ओर से लाई गई चर्चा में कांग्रेस विधायक आशा कुमारी और हिलोपा अध्यक्ष महेश्वर सिंह के भी सुर में सुर मिलाने से वन मंत्री पर दबाव बढ़ गया।
हालांकि उन्होंने चर्चा का जवाब दिया और खुद पर लगे आरोपों को खारिज कर दिया। इससे पहले मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह भी उन्हें क्लीन चिट दे चुके थे।
भाजपा विधायक रविंद्र रवि ने नियम 130 के तहत प्रदेश में निजी भूमि और वनों में हो रहे अवैध कटान पर सदन में चर्चा के के लिए प्रस्ताव लाया।
इस दौरान उन्होंने न केवल शिमला के तारादेवी और जाखू के अवैध कटान का मसला उठाया बल्कि चंबा के सीकरीधार, बकानी और झुमार जंगलों में काटे गए हजारों पेड़ों की घटना को मंत्री से जोड़कर पेश किया।
विपक्ष ने सीडी के माध्यम से साधा निशाना
उन्होंने बकानी जंगल के कटान की सीडी भी सदन में रखी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने ऐसे व्यक्ति को वन विभाग का प्रभार दिया है जो जंगलों की रक्षा करने में नाकाम हैं। बैजनाथ में सफेदे के पेड़ काटने वालों को बचा लिया गया।
सिरमौर में अवैध कटान हो रहा है। इन घटनाओं की जांच सरकार सीबीआई से करवाए और वन मंत्री को बर्खास्त किया जाए। रवि ने चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक आशा कुमारी का नाम लेते हुए कहा कि उनकी शिकायत पर भी सरकार ने वन माफिया पर कार्रवाई नहीं की।
स्पष्टीकरण देते हुए आशा कुमारी ने सदन में अवैध कटान पर कार्रवाई के लिए एक ओर जहां मुख्यमंत्री की तारीफ की, वहीं दूसरी ओर विपक्ष की चिंता और आरोपों को संगीन भी बता दिया।
हिलोपा अध्यक्ष महेश्वर सिंह ने भी आरोप लगाया कि किसी का संरक्षण वन माफिया को प्राप्त है। चर्चा में विधायक सुरेश भारद्वाज, नैना देवी के विधायक रणधीर शर्मा, चुराह के विधायक हंसराज ने विपक्ष की ओर से भाग लिया।
विपक्ष ने किया वॉकआउट
उधर, सदन में कांग्रेस विधायक नंदलाल और बंबर ठाकुर ने अवैध पेड़ कटान मामले में प्रदेश सरकार का बचाव किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने सदन में जनता के लगाए प्रश्न ही नहीं होने दिए। ऐसे में उसको जनता से माफी मांगनी चाहिए। इसके बाद मंत्री ने अपना जवाब दिया, जिसे नकारते हुए विपक्ष ने वाकआउट कर दिया।
जंगल काटने वालों को फांसी नहीं दे सकते: भरमौरी
वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी ने सदन में कहा कि अवैध पेड़ कटान मामले में नियमानुसार प्रदेश सरकार ने कड़ी कार्रवाई की है। हम किसी को फांसी तो नहीं दे सकते सिर्फ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई कर सकते हैं।
तारादेवी में अवैध कटान मामले में संबंधित वन रक्षक, वन उपराजिक, वन परिक्षेत्र अधिकारी, सहायक अरण्यपाल और वनमंडल अधिकारी को निलंबित किया गया है। अरण्यपाल शिमला का स्थानांतरण कर दिया गया है।
राजस्व विभाग की ओर से क्षेत्रीय कानूनगो को भी निलंबित कर दिया गया है। जाखू क्षेत्र में निजी भूमि में अवैध कटान मामले में नियमानुसार डैमेज रिपोर्ट काटी। मौके पर विभाग ने 1.5 क्विंटल लकड़ी जब्त की। इस मामले का न्यायिक दंडाधिकारी शिमला के समक्ष चालान पेश कर दिया गया है।