शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन सरकारी अधिग्रहण के मंदिर और उनसे चढ़ावे को लेकर प्रश्नकाल के दौरान काफी लंबी बहस हुई। मुख्यमंत्री वीरभद्र की अनुपस्थिति में स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ने आशा कुमारी के सवाल के जवाब दिया।
उन्होंने बताया कि मंदिरों के पास जमा सोने-चांदी के उपयोग के लिए हिमाचल सरकार ने एमएमटीसी के साथ एमओयू किया है ताकि सोने को एसबीआई गोल्ड स्कीम और श्रद्धालुओं को सिक्के बनाकर देने में प्रयोग किया जा सके।
इसके बारे में अब मंदिर कमेटियों के प्रमुखों यानी संबंधित उपायुक्तों से सुझाव मांगे गए हैं। सदन में आशा कुमारी की अनुपस्थिति में प्रशभन कुलदीप कुमार ने पूछा।
अनुपूरक सवाल में नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने पूछा कि टेंपल फंड किन-किन विकास कार्यों पर कहां खर्च किया जा सकता है। यह स्पष्ट किया जाना चाहिए।
अगर किसी ने नकली सोना चढ़ाया तो?
चिंतपूर्णी से विधायक कुलदीप कुमार ने दिलचस्प सवाल उठाया कि यदि कोई श्रद्धालु नकली सोना चढ़ा दे तो इसकी पहचान और श्रद्धालु को सजा का कोई प्रावधान है या नहीं।
जवाब में कौल सिंह ने बताया कि ऐसा कोई प्रावधान वर्तमान एक्ट में नहीं है जिससे श्रद्धालुओं को सजा दी सके। जहां तक मंदिरों के पैसे के आवंटन का प्रशभन है तो यह काम मंदिर कमेटी करती है। हालांकि, बहुत से सदस्य इससे सहमत नहीं थे।
सरकार ने जानकारी दी है कि सरकारी अधिग्रहण वाले 29 मंदिरों के पास 178 करोड़ रुपये का सोना-चांदी इस वक्त जमा है। इसमें करीब 5 क्विंटल सोना और 158 क्विंटल चांदी शामिल है। सबसे ज्यादा कमाई ऊना के चिंतपूर्णी मंदिर की है जो सालाना 30 करोड़ है।
ज्वालामुखी मंदिर में डेढ़ क्विंटल चांदी फर्जी
ज्वालामुखी से कांग्रेस विधायक संजय रत्न ने खुलासा किया कि ज्वालामुखी मंदिर में डेढ़ क्विंटल चांदी को ही वेस्ट घोषित कर दिया।
भाजपा विधायक जयराम ठाकुर ने बताया कि हणोगी मंदिर के पास अपने कर्मचारियों को वेतन देने के पैसे नहीं हैं। इस मंदिर से 46 लाख रुपये किसी और मंदिर को बनवाने के रूप से दे दिए गए।
सदन में ज्वालामुखी और हणोगी मंदिरों पर सदन में नए खुलासे हुए। ज्वालामुखी से कांग्रेस विधायक संजय रत्न ने कहा कि ज्वालामुखी मंदिर में डेढ़ क्विंटल चांदी को ही वेस्ट घोषित कर दिया।
मंदिरों में सिक्योरिटी का उचित इंतजाम नहीं है। सोने-चांदी के शुद्धिकरण पर भी उन्होंने सवाल उठाया। वहीं, विधायक जयराम ठाकुर ने बताया कि हणोगी मंदिर के पास अपने कर्मचारियों को वेतन देने के पैसे नहीं हैं। जबकि, यहां से दूसरे मंदिर के निर्माण को पैसा दिया जा रहा है।