हिमाचल प्रदेश की लाहौल घाटी में बर्फ पिघलने से यहां की पहाड़ियों में रहने वाले आईबैक्स ने रिहायशी इलाकों का रुख कर किया है। इन दिनों आईबैक्स को झुंडों में पानी की तलाश में आते देखा जा रहा है। आईबैक्स लाहौल में 10,000 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर पाए जाते हैं। पहाड़ों में बर्फ और निचले इलाकों में बर्फ हटने के बाद दुर्लभ वन्यजीवों ने गांवों के आसपास आना शुरू कर दिया है।
ऐसे में लोग मोबाइल के कैमरे में आईबैक्स की तस्वीरें कैद कर रहे हैं। घाटी में वन्यजीवों के शिकार पर प्रतिबंध है। विशेषकर लाहौल की महिला मंडल वन कटान और वन्य जीव जंतुओं की सुरक्षा के लिए ढाल की तरह खड़ा है। तभी ये जानवर बैखौफ होकर घूम रहे हैं। गुरुवार और शुक्रवार को जिस्पा के समीप लोगों ने आईबैक्स (टंगरोल) के झुंड को सड़क के साथ लगते रिहायशी क्षेत्र के आसपास विचरते हुए देखा।
वन विभाग के वन रक्षक एवं वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर शिव कुमार बताते हैं कि हिमालयन आईबैक्स ( टंगरोल) को साइबेरियन आईबैक्स की उप प्रजाति माना जाता है। लाहौल- स्पीति जिले में वाइल्ड लाइफ टूरिज्म तेजी से विकसित होने की उम्मीद है। लाहौल में आईबैक्स के साथ दुर्लभ प्रजाति के बर्फानी तेंदुए को भी देखा जा सकता है। पिछले करीब एक दशक के भीतर किब्बर वाइल्ड सेंचुरी में आईबैक्स (टंगरोल) की संख्या करीब दोगुना से अधिक बढ़ गई है।
देश व विदेश के पर्यटक दुर्लभ प्रजाति के इन वन्यजीवों को करीबी से निहारने के लिए स्पीति घाटी का रुख कर रहे हैं। अब लाहौल घाटी में पर्यटक इसे करीब से निहार सकेंगे। वनमंडलाधिकारी लाहौल अनिकेत ने बताया कि लाहौल घाटी में वन्यजीवों के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं करता है। इस वजह से आईबैक्स (टंगरोल) बेखौफ कई क्षेत्रों में इन दिनों भी नजर आ रहे हैं।