काम में देरी के बावजूद ठेकेदार को दिए जा रहे करोड़ों पार्षदों ने पूछा, पेयजल कंपनी पर ये मेहरबानी क्यों अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में 24 घंटे पानी देने की योजना के काम पर नगर निगम सदन में मंगलवार को पार्षदों ने पेयजल कंपनी को निशाने पर लिया।
पार्षदों ने पूछा कि करोड़ों रुपये देने के बावजूद शहर में नई योजना से एक भी नया कनेक्शन नहीं लगा है तो फिर ठेकेदार कंपनी पर क्यों मेहरबानी हो रही है। काम में देरी पर उस पर पेनल्टी क्यों नहीं लगाई जा रही? सदन में कांग्रेस पार्षद रामरत्न वर्मा ने योजना के काम को लेकर सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि अब तक ठेकेदार कंपनी को 16 हजार से ज्यादा कनेक्शन नई योजना से जोड़ने के लिए सौंपे जा चुके हैं, लेकिन इनमें से एक को भी नई लाइनों से नहीं जोड़ा है। इसके बावजूद ठेकेदार कंपनी को करोड़ों रुपये जारी हो गए। उन्होंने कहा कि समझौते के अनुसार 47 फीसदी नॉन-रेवेन्यू वाटर को 15 फीसदी तक लाया जाना था लेकिन इस दिशा में कोई काम नहीं हुआ। क्लोरीनेशन के लिए पेयजल कंपनी ने एक करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च कर दिए। ठेकेदार कंपनी क्लोरीनेशन तक नहीं कर रही है। जनता की शिकायतें भी नहीं सुनी जा रही हैं। फिर हर महीने तीन करोड़ रुपये से ज्यादा ठेकेदार कंपनी को क्यों दिए जा रहे हैं? सहायक अभियंता आदर्श चौहान ने कहा कि काम के आधार पर ही ठेकेदार कंपनी को भुगतान किया जा रहा है। काम में देरी पर चार करोड़ रुपये की पेनल्टी भी लगाई है।
बीओडी में उठाएंगे पेनल्टी का मामला मेयर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि काम में देरी हुई है। इसका मामला कंपनी के निदेशक मंडल की बैठक में रखा जाएगा। पार्षदों ने कहा कि जब नगर निगम कंपनी का 51 फीसदी मालिक है तो हर भुगतान के बिल सदन में लाए जाएं। पार्षद कमलेश मेहता और विशाखा मोदी ने भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहला पैकेज ढली और मशोबरा का था, जो एक साल पहले शुरू हुआ था। यह काम आज तक पूरा नहीं हुआ है। पार्षद नरेंद्र ठाकुर ने कहा कि कंपनी पांचवें दिन पानी दे रही है।