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आखिर कौन होगा सीएम वीरभद्र सिंह का उत्तराधिकारी?

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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का उत्तराधिकारी कौन होगा। वीरवार को वीरभद्र सिंह की ओर से अगली बार मुख्यमंत्री न बनने के ऐलान के बाद कांग्रेस के सेकंड लाइन के नेताओं में हलचल बढ़ गई है।
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कांग्रेस के भीतर स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर, शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा, उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री और वीरभद्र के पुत्र एवं युकां अध्यक्ष विक्रमादित्य सिंह को उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जा रहा है।

विधानसभा 2012 के चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के कई नेता मुख्यमंत्री की दौड़ में शामिल थे। मुख्यमंत्री बनने के लिए उनकी ओर से पूरी कोशिश की गई। परिवहन मंत्री जीएस बाली से लेकर तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष कौल सिंह ठाकुर का नाम सबसे आगे थे, लेकिन वीरभद्र सिंह के आगे किसी की भी नहीं चली। कांग्रेस के अखाड़े में वीरभद्र सिंह ने सबको पटकनी दे दी।
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सीएम ने की है चुनाव न लड़ने की घोषणा

उम्र के इस पड़ाव पर अब वीरभद्र सिंह ने खुद ही सातवीं बार मुख्यमंत्री न बनने की इच्छा जाहिर की है। ऐसे में कांग्रेस के सेकंड लाइन के नेताओं के भीतर अगली बार मुख्यमंत्री बनने के लिए इच्छाएं कुलाचें मारने लगी हैं। हालांकि, चुनाव के बाद यह तसवीर साफ होगी कि सत्ता में कांग्रेस आएगी या फिर भाजपा। वैसे पिछले तीन दशक से भाजपा और कांग्रेस का एक-एक बार सत्ता में आने का ट्रेंड बन गया है।

कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि बेशक विक्रमादित्य का राजनीतिक अनुभव कम है, लेकिन वह भी सीधे तौर पर सीएम की दौड़ में शामिल हो सकते हैं। उधर, कौल सिंह ठाकुर की ओर से पहले से ही मुख्यमंत्री पद के लिए दावेदारी पेश की जाती रही है, जबकि वीरभद्र सिंह पहले ही कई बार शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा और उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री को सीएम पद के लिए उचित दावेदार बता चुके हैं। साथ ही वह यह भी कह चुके हैं कि उनके करीब जो है, वही अगला मुख्यमंत्री बन सकता है।
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पार्टी ने कहा तो लड़ूंगा लोस चुनावः विक्रमादित्य

वहीं, युकां प्रदेशाध्यक्ष विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि यदि अगले चुनाव में पार्टी हाईकमान उन्हें मंडी लोकसभा चुनाव से टिकट देती है तो वे इस चुनौती को स्वीकार करेंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री के मनाली दौरे के दौरान 14 मील में पत्रकारों से यह बात कही। इधर, खेल विधेयक को कार्यकारी राज्यपाल कल्याण सिंह की ओर से रोके जाने पर विक्रमादित्य ने आपत्ति जताई है।

कहा कि प्रदेश में राज्यपाल शासन नहीं है। राज्यपाल को खिलाड़ियों के हित में इस बिल को मंजूरी देनी चाहिए। उन्होंने बीसीसीआई सचिव तथा लोस सांसद अनुराग ठाकुर पर खेल विधेयक और एचपीसीए के नाम पर प्रदेश के युवाओं को गुमराह करने का आरोप लगाया। परिवहन मंत्री की रोजगार यात्रा पर उन्होंने कहा कि यात्राओं से किसी को रोजगार नहीं मिलते।
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