हिमाचल प्रदेश के किसानों को गेहूं की फसल बेचने के लिए पंजाब और हरियाणा में नहीं भटकना पड़ेगा। किसान अब हिमाचल प्रदेश में ही गेहूं की फसल बेच सकेंगे। इसके लिए गेहूं खरीद केंद्र खोले जा रहे हैं। इससे पहले किसानों को फसल बेचने के लिए पंजाब और हरियाणा जाना पड़ता था। कृषि मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा कि गत वर्ष प्रदेश में लगभग 340 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की बुआई की गई थी और इस साल लगभग 672 हजार मीट्रिक टन उत्पादन का अनुमान है।
कांगड़ा, सोलन, सिरमौर और ऊना के किसान पूर्व में अपनी उपज अपने निकटतम राज्य पंजाब और हरियाणा में बेचा करते थे। उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ता था। कंवर ने कहा कि प्रदेश के किसानों की सुविधा और हित को ध्यान में रखते हुए सरकार ने फैसला लिया है कि इस वर्ष प्रदेश में ही गेहूं खरीद केंद्र खोले जाएंगे। भारतीय खाद्य निगम ने कल्याण योजनाओं के लिए अनाज की मांग पूरा करने के लिये राज्य सरकारों की एजेंसियों के साथ मिलकर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद करती है।
इस वर्ष राज्य सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1975 रुपये तय किया है। उन्होंने गेहूं खरीद के लिए समय रहते सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त करने और खरीद केंद्रों पर सभी प्रकार की मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने सोलन जिले के नालागढ़ में गेहूं खरीद केंद्र खोलने के लिए मंडी समिति सोलन के अध्यक्ष, मार्केटिंग बोर्ड के प्रबंध निदेशक के साथ मार्केट यार्ड का निरीक्षण किया। उन्होंने सचिव मंडी समिति सोलन को निर्देश दिए कि वहां पर खरीद से संबंधित उपकरण और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाएं।
अभी तक प्रदेश में 6701 क्विंटल गेहूं की खरीद
चालू विपणन वर्ष के दौरान प्रदेश में अभी तक लगभग 6701 क्विंटल गेहूं की खरीद की जा चुकी है। पांवटा साहिब में 5570, कालाअंब में 367, ऊना जिले के कांगड़ (हरोली) में 379.50, टकारला में 132, जिला कांगड़ा के फतेहपुर में 252.50 क्विंटल गेहूं की खरीद की गई है। आने वाले हफ्तों में इसमें और तेजी आने की उम्मीद है।