शिक्षक महासंघ के शिष्टमंडल ने मुख्यमंत्री से मिला।
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प्री-बोर्ड और टर्म परीक्षाओं की औसत पर 10वीं कक्षा का परिणाम घोषित किया जाए। यह मांग शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ की अगुवाई में शिमला में मिले शिष्टमंडल ने मुख्यमंत्री से उठाई। शिष्टमंडल में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव पवन मिश्रा, प्रांत अध्यक्ष पवन कुमार, उपाध्यक्ष डॉ. मामराज पुंडीर, राज्य महामंत्री विनोद सूद शामिल रहे। महासंघ के प्रदेश मीडिया प्रभारी दर्शन लाल ने बताया कि हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ की तरफ से शिक्षकों से जुड़ी विभिन्न मांगों को लेकर 13 सूत्री मांगपत्र सरकार को सौंपा गया है। मुख्यमंत्री ने सभी मांगों पर गौर कर क्रमबद्ध पूरा करने का आश्वासन दिया है।
मांगपत्र में प्रमुख रूप से योग्यता पूरी करने वाले भाषा अध्यापकों को आरएंडपी नियम में सुधार करके टीजीटी बनाने, 2010 से पहले नियुक्त टीजीटी को पदोन्नति में मुख्याध्यापक और प्रवक्ता दोनों ऑप्शन बहाल करने, डाइट में कार्य कर रहे सभी अध्यापकों के प्रवक्ता होने के नाते डाइट का नियंत्रण उच्च शिक्षा निदेशालय के अधीन करने, 2012 से पहले पदोन्नत एचटी को पदोन्नति वेतन वृद्धि प्रदान करने और मार्च 2004 से पहले की पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग उठाई गई है। कोरोना के चलते स्कूलों को खोलने और चलाने के लिए पांच सुझाव रखे गए हैं। इसमें सामान्य स्थिति होने पर बारहवीं की परीक्षा करवाने, स्कूलों में बच्चों की एडमिशन करवाने के लिए एक मई के बाद रोटेशन के आधार पर अध्यापकों को स्कूल बुलाने, स्कूलों में अध्यापकों का बिना टीकाकरण के प्रवेश वर्जित करने संबंधी सुझाव सरकार के समक्ष रखे गए। उन्होंने बताया कि शिक्षकों से जुड़ी ज्वलंत मांगों को लेकर मुख्यमंत्री ने महासंघ को पूरा करने का आश्वासन दिया है।