फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गेहूं की पैदावार कम कर देते हैं खरपतवार, ये सावधानियां बरतें किसान

Mon, 20 Jan 2020 10:40 AM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धर्मशाला
विज्ञापन
फाइल फोटो
विज्ञापन

गेहूं हमारे प्रदेश की मुख्य फसल है, परंतु प्रदेश में गेहूं की उत्पादकता पड़ोसी राज्यों व राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। इसे बढ़ाने की असीम संभावनाएं हैं। गेहूं फसल को हानि पहुंचाने वाले विभिन्न कारकों में सबसे अधिक हानि खरपतवार पहुंचाते हैं। ये अवांछनीय पौधे गेहूं में उगकर पोषक तत्वों, नमी, वायु, प्रकाश व स्थान आदि के लिए स्पर्धा कर फसल को  कमजोर बना देते हैं।

विज्ञापन


हानिकारक कीटों व बीमारियों का आश्रय स्थल बनकर फसल की उपज व गुणवत्ता को बुरी तरह प्रभावित करते हैं। गेहूं की फसल में खरपतवारों से होने वाले नुकसान को 25-75 प्रतिशत तक आंका गया है। किसान प्राय: अपनी फसल में निकलने वाले खरपतवारों को जानवरों के चारे के लिए उपयोग करने के लिए समय पर इनका नियंत्रण नहीं करते व इससे उनकी उपज में भारी कमी आ जाती है।

खरपतवार नियंत्रण के लिए गेहूं की प्रारंभिक अवस्था, जोकि 30-45 दिन आंकी गई है अति महत्वपूर्ण है। इसमें इनका निदान किसी भी विधि से अत्यंत आवश्यक है, अन्यथा फसल के उत्पादन में कमी आती है। गेहूं में खरपतवारों की रोकथाम के लिए किसान कई तरीके अपना सकते हैं। इनमें दवाइयों का छिड़काव से लेकर निराई-गुड़ाई से भी खरपतवार पर अंकुश लगाया जा सकता है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

यह सावधानियां बरतें किसान

लेखक डॉ. विनोद शर्मा - फोटो : अमर उजाला
- खरपतवारनाशी का प्रयोग करते समय खेतों में नमी का होना आवश्यक है।
- खरपतवार के प्रकार और संख्या को ध्यान में रखकर खरपतवारनाशी का चुनाव करें।
- छिड़ककाव करते समय खरपतवार व फसल की अवस्था का ध्यान रखें।
- छिड़काव फ्लैट फैन नोजिल लगे पंप से ही करें।
- खरपतवारनाशी का सही मात्रा, सही समय एवं उपयुक्त तकनीक से छिड़काव करें। 
- गेहूं में खरपतवार निवारण के लिए खरपतवारनाशी को अदल-बदल कर उपयोग में लाएं।


लेखक का प्रोफाइल
लेखक डॉ. विनोद शर्मा को प्रधान वैज्ञानिक हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर में पिछले 30 वर्षों से कृषि अनुसंधान शिक्षा और प्रसार का अनुभव है।
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें