गेहूं हमारे प्रदेश की मुख्य फसल है, परंतु प्रदेश में गेहूं की उत्पादकता पड़ोसी राज्यों व राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। इसे बढ़ाने की असीम संभावनाएं हैं। गेहूं फसल को हानि पहुंचाने वाले विभिन्न कारकों में सबसे अधिक हानि खरपतवार पहुंचाते हैं। ये अवांछनीय पौधे गेहूं में उगकर पोषक तत्वों, नमी, वायु, प्रकाश व स्थान आदि के लिए स्पर्धा कर फसल को कमजोर बना देते हैं।
हानिकारक कीटों व बीमारियों का आश्रय स्थल बनकर फसल की उपज व गुणवत्ता को बुरी तरह प्रभावित करते हैं। गेहूं की फसल में खरपतवारों से होने वाले नुकसान को 25-75 प्रतिशत तक आंका गया है। किसान प्राय: अपनी फसल में निकलने वाले खरपतवारों को जानवरों के चारे के लिए उपयोग करने के लिए समय पर इनका नियंत्रण नहीं करते व इससे उनकी उपज में भारी कमी आ जाती है।
खरपतवार नियंत्रण के लिए गेहूं की प्रारंभिक अवस्था, जोकि 30-45 दिन आंकी गई है अति महत्वपूर्ण है। इसमें इनका निदान किसी भी विधि से अत्यंत आवश्यक है, अन्यथा फसल के उत्पादन में कमी आती है। गेहूं में खरपतवारों की रोकथाम के लिए किसान कई तरीके अपना सकते हैं। इनमें दवाइयों का छिड़काव से लेकर निराई-गुड़ाई से भी खरपतवार पर अंकुश लगाया जा सकता है।