बागवानी विभाग का अनुमान 3,451 मीट्रिक टन का पैदावार का अनुमान, बीते वर्ष 3,884 मीट्रिक टन हुआ था उत्पादन
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पहले बारिश नहीं हुई फिर ओलावृष्टि ने तोड़ी कमर
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिले में इस बार स्टोन फ्रूट पर मौसम की बेरुखी भारी पड़ी है। बागवानी विभाग के अनुसार इस बार जिले में स्टोन फ्रूट (गुठलीदार फल) का उत्पादन कम होने का अनुमान है। इस बार करीब 450 से 500 मीट्रिक कम उत्पादन होने का अनुमान है। चेरी, प्लम, खुमानी और आड़ू की फसल सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। विभाग के अनुसार फील्ड अधिकारियों की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार इस बार जिले में 3451 मीट्रिक टन स्टोन फ्रूट का उत्पादन होने का प्रारंभिक अनुमान है। बीते वर्ष जिला में 3884 मीट्रिक टन स्टोन फ्रूट का उत्पादन हुआ था। विभाग के अधिकारियों ने कहा कि इस बार मौसम की मार की बजह से उत्पादन कम होने की संभावना है। अधिकारियों का कहना है कि पहले समय पर बारिश नहीं हुई इस कारण फ्रूट की सही से फ्लावरिंग नहीं हुई। अब ओलावृष्टि से नुकसान हो रहा है। अभी स्टोन फ्रूट का सीजन शुरू ही हुआ है। जिला में लगातार बारिश और ओलावृष्टि हो रही है। इसके कारण अभी भी नुकसान हो रहा है। विभाग की फील्ड टीम नुकसान का आकलन कर रही है, जिले में जिस तरह बारिश और ओलावृष्टि हो रही है इस कारण उत्पादन और कम हो सकता है।
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जिले में मुख्य रूप से चेरी, प्लम, खुमानी और आड़ू का मुख्य रूप से उत्पादन होता है। जिले के ठियोग, सुन्नी, नारकंडा, कोटखाई, चौपाल, रामपुर, जुब्बल और रोहड़ू ब्लॉक में स्टोन फ्रूट का उत्पादन होता है। बागवानों का रुझान स्टोन फ्रूट की तरफ बढ़ा है। बागवान नई किस्म के स्टोन फ्रूट के बगीचे तैयार कर रहे हैं। बागवानों का कहना है कि सालभर बगीचे में मेहनत करते हैं लेकिन बीते कुछ सालों से लगातार मौसम की मार पड़ रही है।
कोट स्टोन फ्रूट का सीजन शुरू हो गया है। विभाग की फील्ड टीम की रिपोर्ट के अनुसार इस बार जिले में 3451 मीट्रिक टन उत्पादन होने का प्रारंभिक अनुमान है। हालांकि अभी सीजन शुरू ही हुआ है, सीजन जैसे-जैसे आगे बढ़ेगा स्टोन फ्रूट के उत्पादन के बारे में स्थिति और स्पष्ट हो पाएगी। डॉ. प्रदीप हिमराल, बागवानी विशेषज्ञ, उद्यान विभाग