154 साल पुरानी सियोग पेयजल योजना की 2,800 मीटर लंबी पाइपलाइन बदलने की है योजना, शहर को मिलेगा ज्यादा पानी
सियोग से ढली तक आरक्षित वन क्षेत्र से बिछनी है पाइपलाइन, कंपनी ने वन्य जीव विभाग को भेजी फाइल
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी की सबसे पुरानी पेयजल योजना सियोग की पाइपलाइन बदलने का काम फिलहाल रोक दिया गया है। आरक्षित वन क्षेत्र में बिछने वाली इस पाइपलाइन के लिए वन मंजूरी लेनी होगी। ऐसे में पेयजल कंपनी को अब मंजूरी के लिए आवेदन करना पड़ा है। इसकी फाइल वन्य जीव विभाग को भेज दी गई है।
पेयजल कंपनी के अनुसार सियोग से ढली तक करीब 2,800 मीटर लंबी पाइपलाइन को बदला जा रहा है। यहां छह इंच की नई लाइन बिछाई जा रही है। यह क्षेत्र वन्य जीव विभाग का आरक्षित क्षेत्र है। यहां किसी भी तरह के निर्माण की अनुमति नहीं है। पेयजल कंपनी ने ब्रिटिश शासनकाल में बने सियोग के नौ एमएलडी के टैंक की मरम्मत के बाद पाइपलाइन बिछाने का काम शुरू करने की तैयारी कर ली थी। इसके लिए मौके पर नई पाइपें भी मंगवा ली गई थी, लेकिन मंजूरी न होने के कारण वन विभाग ने काम शुरू करने की अनुमति नहीं दी। अब कंपनी ने मंजूरी के लिए आवेदन किया है। अभी यह फाइल वन्य जीव विभाग के मुख्यालय में पहुंची है। यहां प्रधान मुख्य अरण्यपाल की मंजूरी पर ही इसका काम शुरू करने की अनुमति मिल सकती है। पेयजल कंपनी के एजीएम पीपी शर्मा ने कहा कि मंजूरी मिलते ही काम शुरू हो जाएगा।
शहर को मिलेगा ज्यादा पानी, बरसात में मिलेगी राहत
इस परियोजना की पाइपलाइन दशकों पुरानी है। यह जर्जर हो चुकी है जिससे पानी की लीकेज हो रही है। सियोग से शिमला शहर को अभी एक एमएलडी यानि दस लाख लीटर से भी कम पानी मिल रहा है। ऐसे में कंपनी ने इसकी पाइपलाइन बदलने का फैसला लिया है। पाइपलाइन बदलने के बाद इस परियोजना से शहर को बरसात के दिनों में पांच एमएलडी यानि 50 लाख लीटर तक पानी मिल सकेगा। बरसात के दिनों में गिरि में गाद आने से शहर के लिए पानी की आपूर्ति ठप हो जाती है। इससे हर साल शहर में जलसंकट खड़ा हो जाता है। वहीं, बरसात के बावजूद सियोग में पानी साफ रहता है। ऐसे में सियोग से मिलने वाला पानी शहर में इस संकट को खत्म कर सकता है।
इनसेट
1870 में अंग्रेजों ने बनाई थी यह योजना
सियोग पेयजल योजना शिमला की सबसे पुरानी योजना है। ब्रिटिश शासनकाल में इसका निर्माण साल 1870 में किया गया था। हरी भरी वादियों के बीच बनी सियोग योजना से 19 चश्मों का यह पानी उस समय वायस रीगल लॉज यानि एडवांस स्टडी पहुंचता था। यह शिमला की इकलौती ऐसी योजना है जिसका पानी बिना पंपिंग के ग्रेविटी से शिमला तक पहुंचता है। सियोग में नौ एमएलडी का टैंक भी बना है जो आजकल फुल है। हाल ही में शिमला दौरे पर आईं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी सियोग का दौरा किया था।