हिमाचल प्रदेश में अब बिना मंजूरी पानी में होने वाली खेल गतिविधियां नहीं हो सकेंगी। आवश्यक सुरक्षा नियम पूरा नहीं करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। पर्यटन विभाग ने साहसिक गतिविधियों के दौरान अधिक सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित करने के लिए हिमाचल प्रदेश जल क्रीड़ा और संबद्ध क्रियाकलाप प्रारूप नियम-2021 को अधिसूचित कर दिया है। राजपत्र में मंगलवार को अधिसूचना जारी होते ही प्रदेश में जलक्रीड़ा को लेकर नए नियम लागू हो गए हैं।
अधिसूचना में विभिन्न गतिविधियों के लिए बांध क्षेत्र, नदियों और प्राकृतिक झीलों का भी चयन कर लिया गया है। जल क्रीड़ाएं करवाने के लिए बांध क्षेत्रों में महाराणा प्रताप सागर (पौंग डैम), गोबिंद सागर झील, लारजी परियोजना जलाशय, कोल बांध परियोजना जलाशय, पंडोह बांध जलाशय, चमेरा परियोजना-एक, दो और तीन बांध जलाशय और नाथपा बांध जलाशय को चुना गया है।
नदियों में सतलुज, ब्यास, रावी, यमुना, गिरी, पब्बर, बास्पा, स्पीति, चंद्रभागा और प्राकृतिक झील में रेणुका झील को चुना गया है। जल क्रीड़ा में वेक बोर्डिंग, वाटर स्कीइंग, जैट स्कीइंग, स्काई बोर्डिंग, वाटर स्कूटर, फनराइड जैसे ट्यूब राइड, बनाना राइड, रिंगो राइड, डॉनट राइड, रोइंग, क्याकिंग और कनोइंग को शामिल किया गया है। संबद्ध क्रियाकलापों में देसी नौका पर नौका विहार, चप्पू नौका विहार, विद्युत/गति/इंजन चलित नौकायन नौका विहार, शिकारा (हाउस बोट) पर नौका विहार, पोत पर अवकाश पर्यटन को शामिल किया गया है।
तीन साल के लिए जारी होगी प्रमाणपत्र
जलक्रीड़ा और संबद्ध क्रियाकलाप के लिए तीन साल की अवधि का रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। विदेशी नागरिक को प्रमाणपत्र नहीं मिलेगा। राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय संस्थान से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले व्यक्ति को ही जल क्रीड़ाएं करवाने की अनुमति दी जाएगी। हृदय की कमजोर स्थिति, मिर्गी, फेफड़ों के विकार, दमा से पीड़ित सहभागियों और गर्भवती महिलाओं का जल क्रीड़ा में भाग लेना वर्जित होगा। नशे का सेवन किए हुए व्यक्ति को भी अनुमति नहीं दी जाएगी। निर्धारित कपड़े पहनकर ही जल क्रीड़ा में शामिल हो सकेंगे। जल क्रीड़ा और संबद्ध क्रियाकलाप करने वाले लोगों को इसमें शामिल होने से पहले गतिविधि के दौरान किसी भी प्रकार की दुघर्टना होने की स्थिति में खुद की जिम्मेवारी लिखित में देनी होगी।