वर्कशाप में शहर के लोगों ने उठाई मांग, सतलुज वाटर प्रोजेक्ट पर वर्कशॉप का आयोजन
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहरवासियों को 24 घंटे पानी देने के लिए बनने वाले सतलुज वाटर प्रोजेक्ट से पर्यावरण पर क्या असर पड़ेगा, इस विषय पर वीरवार को कंपनी कार्यालय में वर्कशॉप का आयोजन किया गया। इसमें वर्ल्ड बैंक के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और बताया कि किस तरह यह प्रोजेक्ट कार्यान्वित किया जाना है।
प्रतिनिधि नेहा व्यास ने बताया कि इस प्रोजेक्ट को तैयार करते समय पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। पानी की गुणवत्ता पर भी फोक्स रहेगा। कंपनी के एमडी धर्मेंद्र गिल ने प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी दी। कहा कि इससे शहर में पानी की कमी खत्म हो जाएगी। वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये वर्कशॉप से जुड़े लोगों ने प्रोजेक्ट को लेकर सुझाव भी दिए। कहा कि पेयजल शिकायतों का सही तरीके से निपटारा होना चाहिए। श्रम विभाग के प्रतिनिधि ने कहा कि वर्ल्ड बैंक के प्रोजेक्टों में हिमाचली लोगों को काम में प्राथमिकता दी जाए। श्रम कानूनों का पालन करें।
कंपनी की ओर से तैनात की गईं जलसखियों ने रिपोर्ट दी है कि शहर में सर्वे के दौरान पाया गया कि कई पेयजल मीटर घरों के भीतर लगे हैं। इससे रीडिंग नहीं हो पा रही। लोग मासिक बिल की मांग करते हैं। कई जगह पानी की सप्लाई की टाइमिंग को लेकर लोगों के सवाल है। रात को पानी की सप्लाई मिलने से कई टंकियां ओवरफ्लो करती हैं। लोग सप्लाई की टाइमिंग बदलने की मांग कर रहे हैं। वर्ल्ड बैंक प्रोजेक्ट में इस तरह की खामियां नहीं होनी चाहिए।