राजधानी शिमला की तरह प्रदेश के चार और बड़े शहरों की पेयजल व्यवस्था अब कंपनी को सौंपने की तैयारी है। मंडी, धर्मशाला, सोलन और पालमपुर शहर में भी अब पेयजल व्यवस्था में बदलाव किया जाएगा। शिमला की तर्ज पर इन शहरों में पानी की आपूर्ति का जिम्मा जल प्रबंधन निगम लिमिटेड संभालेगी।
कई साल से फाइलों में अटके इस प्रस्ताव को अब धरातल पर उतारने की तैयारी है। विश्वबैंक के साथ मिलकर इन शहरों में पानी की व्यवस्था सुधारी जाएगी। शिमला दौरे पर आई विश्वबैंक की टीम ने शुक्रवार को शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह के साथ बैठक की। इस दौरान शहरी विकास विभाग के प्रधान सचिव देवेश कुमार ने मंत्री को बताया कि शिमला जल प्रबंधन निगम लिमिटेड का चार और शहरों में विस्तार किया जा सकता है। इन शहरों में विश्वबैंक की मदद से पेयजल व्यवस्था मजबूत की जाएगी। इन शहरों को अधीन करने के बाद शिमला की जगह इसे हिमाचल जल प्रबंधन निगम लिमिटेड कंपनी नाम दिया जा सकता है। इन शहरों में पानी की आपूर्ति सुचारू करने के लिए 250 मिलियन डॉलर तक की लागत आएगी जिसमें विश्वबैंक मदद करेगा।
शहर में जल्द काम शुरू करने के निर्देश
विश्व बैंक टीम की अगुवाई कर रही कारमेन और प्रतिनिधि तनुज माथुर ने शिमला शहर की पेयजल योजना पर भी मंत्री से बात की। कहा कि अभी तक किए गए काम से बैंक संतुष्ट है। मंत्री को शिमला शहर में 24 घंटे पानी देने के लिए होने वाले काम को जल्द शुरू करने को कहा। विश्वबैंक की मदद से शिमला शहर के लिए सतलुज से पानी लाया जा रहा है। अगले साल तक सतलुज का पानी शिमला पहुंचने की उम्मीद है। रोजाना सतलुज से शहर को 66 एमएलडी पानी मिलेगा।