पंजाब वक्फ बोर्ड से अलग होने के 11 साल बाद भी हिमाचल प्रदेश में वक्फ संपत्तियां अब तक हिमाचल वक्फ बोर्ड के अंडर नहीं आ सकी हैं। वक्फ की ज्यादातर संपत्तियों का कस्टोडियन अभी भी सेंट्रल वक्फ बोर्ड है। यही वजह है कि करोड़ों रुपये कीमत की प्राइम लोकेशन पर होने के बावजूद वक्फ बोर्ड को इन संपत्तियों से एक रुपया भी किराये के तौर पर नहीं मिल रहा है।
11 साल बाद अब हिमाचल वक्फ बोर्ड ने इन संपत्तियों को सेंट्रल कस्टोडियन से हिमाचल वक्फ बोर्ड के अधीन करने की कवायद शुरू की है। हिमाचल प्रदेश के सोलन, शिमला, मंडी और धर्मशाला में वक्फ बोर्ड की काफी संपत्तियां हैं। साल 2005 से पहले तक इन वक्फ संपत्तियों पर पंजाब वक्फ बोर्ड का नियंत्रण था।
2005 में पंजाब वक्फ बोर्ड से अलग होकर हिमाचल प्रदेश वक्फ बोर्ड का गठन किया गया। इसके बाद से हिमाचल वक्फ बोर्ड पर इन संपत्तियों की जिम्मेदारी आ गई। सूत्रों की मानें तो वक्फ संपत्तियों के ट्रांसफर के बावजूद बोर्ड ने इनके मालिकाना हक के लिए लड़ाई नहीं लड़ी। इसकी वजह से वक्फ बोर्ड के बजाय इन संपत्तियों का कस्टोडियन सेंट्रल बन गया।
खास बात यह है कि 11 साल से वक्फ को किराया न मिलने के बावजूद हिमाचल वक्फ बोर्ड ने मालिकाना हक को लेकर कदम नहीं उठाया। इसका नतीजा यह हुआ कि किराएदारों ने भी वक्फ को किराया देना बंद कर दिया।
हाल ही में जब हाईकोर्ट ने वक्फ संपत्तियों पर कब्जे को लेकर सख्ती की तो सेंट्रल कस्टोडियन की बात सामने आई। इसके बाद अब वक्फ बोर्ड ने संपत्तियों को सेंट्रल कस्टोडियन से हिमाचल वक्फ बोर्ड के अधीन करने की कवायद शुरू की है।
करोड़ों की संपत्तियों पर नहीं मिल रहा किराया
माली रूप से खस्ताहाल वक्फ बोर्ड में हाल ही में सीईओ लगाए गए आईपीएस एपी सिद्दीकी ने बोर्ड को उबारने की कवायद शुरू की है। सिद्दीकी ने कहा कि राज्य के राजस्व विभाग से संपर्क कर प्रयास किया जा रहा है कि वक्फ की सभी संपत्तियों का मालिकाना हक हिमाचल वक्फ बोर्ड के नाम हो जाए।
इसके लिए जल्द ही नोटिफिकेशन जारी करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसा होने से वक्फ संपत्तियों से बोर्ड को किराया मिलेगा, जिससे बोर्ड की माली हालत कुछ हद तक ठीक हो जाएगी।