दुधारू पशुओं में दूध की क्षमता बढ़ाने के लिए लगाए जाने वाले इंजेक्शन का गिद्धों पर विपरीत असर पड़ रहा था। जानवर के मरने के बाद गिद्ध जब उन्हें खाते हैं तो उस दवा का विपरीत असर उन पर पड़ता है। इससे गिद्धों की मौत हो रही थी।
इसी कारण गिद्धों की संख्या भी घटने लगी। अब जब जानवरों के मरने के बाद खुले में फेंकने से संक्रमण बढ़ने लगा तो गिद्धों के संरक्षण और प्रजनन प्रोजेक्टों पर काम करना अनिवार्य हो गया।
कांगड़ा के विभिन्न क्षेत्रों में गिद्धों की संख्या जानने के लिए सर्वे शुरू किया है। इसकी रिपोर्ट अप्रैल में तैयार कर ली जाएगी। - विनोद कुमार शर्मा, डीएफओ, वन्य जीव विभाग, हमीरपुर