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सात साल बाद प्रशासनिक ट्रिब्यूनल शुरू

Fri, 27 Feb 2015 10:53 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल में सात साल बाद फिर प्रशासनिक ट्रिब्यूनल शुरू हो गया है। शुक्रवार को ट्रिब्यूनल के चेयरमैन वीके शर्मा ने पदभार ग्रहण किया। शनिवार से शिमला स्थित मुख्य कार्यालय मजीठा हाउस में फिर से कामकाज शुरू हो जाएगा। सरकारी विभागों और निगमों-बोर्डों के साढे़ तीन लाख कर्मचारियों के मामले अब यहीं से निपटाए जाएंगे।
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भाजपा कार्यकाल में ट्रिब्यूनल भंग करने के बाद से प्रदेश के कर्मचारियों के करीब 20 हजार मामले हिमाचल हाईकोर्ट में लंबित हैं, अब इन्हें ट्रिब्यूनल में शिफ्ट किया जाएगा। हाई कोर्ट में मर्ज किए गए ट्रिब्यूनल के कर्मचारी भी वापस लौट आएंगे। मजीठा हाउस में चल रहे तीन कार्यालयों सूचना आयोग, चुनाव आयोग और डीआईसी कार्यालय को यहां से दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा।

शुक्रवार को राज्य सचिवालय शिमला में आयोजित समारोह में मुख्य सचिव पी मित्रा ने भारत के राष्ट्रपति की ओर से जारी नियुक्ति पत्र पढ़ा और वीके शर्मा ने प्रशासनिक ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष का पदभार संभाला। इस अवसर पर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, आईपीएच मंत्री विद्या स्टोक्स, वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी, उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री धनी राम शांडिल, नगर निगम शिमला के महापौर संजय चौहान सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।
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हाई कोर्ट के न्यायाधीश रह चुके हैं शर्मा- न्यायमूर्ति वीके शर्मा मूल रूप से कांगड़ा जिले के रहने वाले हैं। वे 7 जनवरी 2010 को हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश बने और 4 अक्तूबर 2013 को हाईकोर्ट के स्थायी न्यायाधीश बने। 8 अगस्त 2014 को सेवानिवृत्त हुए और 29 दिसंबर 2014 को उन्हें हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक ट्रिब्यूनल का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।

ईमानदारी से करेंगे मामलों का निपटारा- ट्रिब्यूनल के नवनियुक्त चेयरमैन वीके शर्मा ने कहा कि वह ईमानदारी और कर्तव्य परायणता से कर्मचारियों के मामलों का निपटारा करेंगे। इस नई जिम्मेदारी पर वह खरा उतरेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि मामलों का निपटारा समयबद्ध होगा।

स्कीनिंग कमेटी की मीटिंग आज- हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में शनिवार को स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक होगी, जिसमें प्रशासनिक ट्रिब्यूनल के चार सदस्यों का नाम चयन किया जाएगा। नाम चयन के बाद इन्हें सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भेजा जाएगा। वहां से सदस्यों के नाम पर मुहर लगने के बाद फाइल प्रधानमंत्री को भेजी जाएगी। सदस्यों के लिए अभी तक 30 से अधिक आवेदन आए हैं।
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