एशियाई खेलों में कबड्डी में स्वर्ण जीतने वाली भारतीय पुरुष टीम के सदस्य और डिफेंडर हिमाचल प्रदेश के ऊना के लोअर देहलां निवासी विशाल भारद्वाज बुधवार को पैतृक गांव पहुंचे। होनहार खिलाड़ी के परिजन देश के लिए सोना लाने पर बेहद खुश दिखे। विशाल की माता अंजू और बहन कनिका ने उनका स्वर्ण पदक पहनाकर स्वागत किया। विशाल ने सफलता का श्रेय परिजनों समेत कोच सुशील कुमार, जयपाल चंदेल और नंदलाल ठाकुर को दिया। विशाल ने हिमाचल सरकार से खेल नीति में खिलाड़ियों के हित में बदलाव की मांग की।
उन्होंने ए ग्रेड नौकरी देने सहित खिलाड़ियों को तीन करोड़ रुपये देने की बात की। बताया कि अन्य राज्यों में एशियन खेलों में स्वर्ण पदक लाने वाले खिलाड़ियों को तीन करोड़, रजत पर दो करोड़ और कांस्य पदक पर एक करोड़ की राशि दी जाती है। हिमाचल में स्वर्ण पदक लाने वाले खिलाड़ियों को आधे से कम 30-50 लाख रुपये तक राशि ही प्रदान की जाती है। रजत-कांस्य पदकों में तो बेहद कम राशि दी जाती है। यह खिलाड़ियों के साथ कहीं न कहीं मजाक है। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू, उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री और खेलमंत्री विक्रमादित्य सिंह से इस दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की है।
दिल्ली में पीएम ने किया स्वागत, जिले में बधाई संदेश भी नहीं
हांगझोऊ से गोल्ड मेडल लेकर लौटे सभी खिलाड़ियों का मंगलवार को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केेंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने स्वागत किया। विशाल भारद्वाज जब ऊना अपने पैतृक गांव पहुंचे तो प्रशासनिक या सरकार के स्तर पर बधाई के लिए कोई नहीं पहुंचा और न ही बधाई संदेश मिला। विशाल ने बताया कि प्रो. कबड्डी में उनका चयन दिल्ली की टीम में हुआ है। इसके लिए शिविर एक सप्ताह बाद शुरू होने वाला है। इसमें भाग लेकर टीम की जीत के लिए मेहनत पर डट जाएंगे।