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कार्यकर्ताओं के बीच वीरभद्र ने खोला सुक्खू के खिलाफ मोर्चा, हर जनसभा में निशाने पर

Mon, 18 Jun 2018 10:55 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद खामोशी साधे वीरभद्र सिंह लोकसभा चुनाव की आहट के साथ दोबारा मैदान में उतरे हैं। उन्होंने अपनी रणनीति बदलते हुए कार्यकर्ताओं के बीच जाकर विरोधियों खासकर पार्टी अध्यक्ष सुखविंद्र सुक्खू के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। हर जनसभा में सुक्खू उनके निशाने पर नजर आ रहे हैं।

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वीरभद्र सिंह पांच साल पहले सुक्खू के अध्यक्ष बनने के बाद से हाईकमान के फैसले पर नाराजगी जताते रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री रहते कई बार सुक्खू का विरोध किया।  कांग्रेस के सांगठनिक ढांचे को स्वीकार न करते हुए कार्यकर्ताओं की समानांतर बैठकें करवा रहे हैं। उन्होंने लोस चुनाव के लिए प्रचार हिमाचल के निचले क्षेत्रों से शुरू किया है।

शुक्रवार को हमीरपुर दौरे के दौरान उन्होंने विरोधी खेमे के नेताओं को दूर रखा। शनिवार को कांगड़ा दौरे में भी वीरभद्र ने अपने खेमे के नेताओं को बैठक में बुलाया। यहां भी सुक्खू के कांगड़ा के चार संगठनात्मक जिले बनाने के फैसले को गलत करार दिया।
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हाईकमान को कांगड़ा का एक ही संगठनात्मक जिला बनाने का भी प्रस्ताव दिया। रविवार को बिलासपुर में कार्यकर्ताओं की बैठक में भी वीरभद्र ने सुक्खू के खिलाफ मोर्चा खोला।

चारों लोस सीटों पर पसंदीदा उम्मीदवार देना चाहेंगे वीरभद्र

कुछ दिन पहले प्रदेश प्रभारी सुशील शिंदे को बदलकर रजनी पाटिल को हिमाचल का नया प्रभार दिया गया है। प्रदेश के नए सह प्रभारी पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते गुरकीरत सिंह कोहली नियुक्त किए गए हैं। हाईकमान ने यह बदलाव विस चुनाव में कांग्रेस की हार और लोकसभा चुनाव सामने होने पर किया है।

तवा गर्म है और वीरभद्र इस पर चोट करते हुए सुक्खू को पार्टी अध्यक्ष पद से हटाने को दबाव बना रहे हैं। सूत्रों की मानें तो वीरभद्र नहीं चाहते कि चारों लोस सीटों पर उनके पसंदीदा उम्मीदवारों का कोई विरोध करे।
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सुक्खू खुद भी कर चुके अध्यक्ष पद छोड़ने की पेशकश

सूत्र बताते हैं कि सुक्खू करीब तीन महीने पहले खुद प्रदेशाध्यक्ष पद छोड़ने और नई जिम्मेवारी लेने की हाईकमान के समक्ष पेशकश कर चुके हैं, लेकिन राहुल ने उन्हें नहीं हटाया। इसी तरह का दबाव वीरभद्र विस चुनाव से पहले भी बना चुके थे।

तब भी राहुल ने सुक्खू को नहीं हटाया था। कांग्रेस के प्रचार की कमान बेशक वीरभद्र के हाथ में रही, मगर वह सुक्खू पर हार का ठीकरा फोड़ते रहे। दरअसल, सुक्खू पसंदीदा नेताओं को टिकट झटकने में कामयाब हो गए थे। जिन लोगों को वीरभद्र ने टिकट दिलाए, उनमें बहुत से नेता चुनाव हार गए।
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