मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश विश्वविद्यालय और शिक्षण संस्थानों को राजनीति का अखाड़ा नहीं बनने दिया जाएगा। जो विद्यार्थी शिक्षण संस्थानों में राजनीति कर तोड़-फोड़ कर संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हैं, उनसे सख्ती से निपटा जाएगा।
छात्र यूनियनों का काम एक-दूसरे का सिर फोड़ना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के हित के लिए कार्य करना है। इसके लिए ही सरकार ने केंद्रीय छात्र परिषद के चुनाव पर प्रतिबंध लगाया है। छात्र परिषद में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के मनोनयन से कॉलेजों का माहौल भी सुधरा है।
शिक्षा के दौरान सक्रिय राजनीति करना बच्चों का अधिकार नहीं, अपितु 18 वर्ष का होने पर वोट देना पहला अधिकार है। छात्र जीवन में जो विद्यार्थी अनुशासन और मर्यादा में नहीं रहता, वह आगे नहीं बढ़ पाता है। सुंदरनगर स्थित एमएलएसएम कॉलेज के वार्षिक समारोह में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह मुख्यातिथि थे।
उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता हासिल करने के लिए शिक्षा के साथ-साथ आगे बढ़ने की चाह होनी चाहिए। जीवन में सफलता मेहनत से मिलती है। विद्यार्थी अगर गुरु की और गुरु अपने संस्थान की इज्जत नहीं करेगा तो कोई भी शिक्षण संस्थान नहीं चल सकता।
इस दौरान सीपीएस सोहन लाल ठाकुर, ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री अनिल शर्मा, आबकारी एक कराधान मंत्री प्रकाश चौधरी, एपीएमसी मंडी के चेयरमैन हरेंद्र सेन, पूर्व छात्र यूनियन के प्रधान अजय राणा और कॉलेज प्राचार्य डॉ. पवन जम्वाल आदि मौजूद रहे।