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CBI की चार्जशीट पर बोले सीएम वीरभद्र- 'अभी तो लड़ाई शुरू हुई है'

Sat, 01 Apr 2017 02:49 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हमीरपुर
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आय से अधिक संपत्ति के मामले में हिमाचल के सीएम वीरभद्र सिंह के खिलाफ सीबीआई द्वारा चार्जशीट पेश किए जाने के बाद सियासत गरमा गई है। हिमाचल के हमीरपुर दौरे पर गए सीएम वीरभद्र सिंह ने कहा कि अभी तो लड़ाई शुरू हुई है। 
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मीडिया से बातचीत करते हुए सीएम वीरभद्र ने कहा कि- सत्यमेव जयते, सत्य की हमेशा ही जीत हुई है। उन्होंने कहा कि मुझे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। इस मामले में जीत उनकी की होगी। सीएम वीरभद्र सिंह भोरंज उप चुनाव को लेकर आज यहां रैली करने वाले हैं।

भाजपा पर निशाना साधते हुए सीएम ने कहा कि मेरा इस्तीफा मांगने वाले बीजेपी नेता कौन होते हैं। वो खुद ही आरोपी हैं और खुद ही मुझसे इस्तीफा मांग रहे हैं। उन्होंने धूमल और जेटली का नाम लेते हुए कहा कि इन दोनों ने मिलकर उन्हें इस केस में फंसाया है। सोची समझी साजिश के तहत उन पर ये केस दर्ज किया गया है।
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शुक्रवार को सीएम वीरभद्र सिंह को लगा था दोहरा झटका

इससे पहले शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति मामले में हिमाचल के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह को किसी भी तरह की राहत देने से इनकार कर दिया था।

अदालत ने दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार करते हुए स्पष्ट कर दिया कि सीबीआई को इस मामले की जांच करने का अधिकार है। इसके बाद सीबीआई ने वीरभद्र सिंह, उनकी पत्नी सहित नौ लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है।

पटियाला हाउस स्थित सीबीआई के विशेष न्यायाधीश वीरेंद्र कुमार गोयल के समक्ष दायर चार्जशीट में वीरभद्र समेत नौ लोगों को आरोपी बनाया गया है। अदालत ने मामले की सुनवाई शनिवार तय की है।

सीबीआई ने इन सभी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत 109, 465, 471 और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 13(2), उपधारा 13(1)(ई) के प्रावधानों के तहत आरोप पत्र दायर किया है। 

अपनी रिपोर्ट में सीबीआई ने करीब 222 गवाहों की भी सूची पेश की है। इससे पूर्व शुक्रवार सुबह हाईकोर्ट ने वीरभद्र व उनकी पत्नी की उस याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें उन्होंने सीबीआई जांच, दिल्ली अदालत में सुनवाई व राज्य सरकार की बिना अनुमति के जांच को चुनौती याचिका खारिज कर दी थी।
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192 फीसदी अधिक पाई गई है सीएम की इनकम

अदालत ने उन्हें प्रदान अंतरिम राहत संबंधी आदेश भी वापस ले लिया था। इस फैसले के तुरंत बाद सीबीआई ने अपना पहले से ही तैयार आरोप पत्र दायर कर दिया। सीबीआई ने आरोप पत्र में तर्क रखा है कि वीरभद्र सिंह 28 मई 2009 से 18 जनवरी 2011 और 19 जनवरी 2011 से 26 जून 2012 के दौरान केंद्र सरकार में बतौर मंत्री थे।

सीबीआई ने अनुसार आरंभिक जांच में पाया गया कि वीरभद्र सिंह ने 2009 से 2012 तक केंद्रीय मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान 6.03 करोड़ रुपये की संपत्ति कथित तौर पर आय से अधिक अर्जित की थी।

सीबीआई के अनुसार जांच में पता चला कि उनकी आय 192 प्रतिशत अधिक पाई गई है। सीबीआई ने आरोप पत्र में तर्क रखा है कि पेश गवाहों के बयानों, दस्तावेजों के आधार पर उपरोक्त आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य हैं और उनके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाए।
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