सीएम वीरभद्र सिंह ने एक बार फिर परिवहन मंत्री जीएस बाली को निशाने पर लिया। सीएम बोले कि जीएस बाली को कोई गलतफहमी है। उनके बयान 24 घंटे में कई बार बदल जाते हैं। सीएम ने व्यंग्य किया कि अकेली चिड़िया मौसम नहीं बदल सकती है।
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वीरभद्र ने किसी का नाम लिए बिना कहा कि बेरोजगारी भत्ते का मुद्दा उछालकर कुछ लोग क्रिकेट एसोसिएशन पर सुप्रीम कोर्ट से आए फैसले के बाद भाजपा की किरकिरी का मुद्दा दबाने का प्रयास कर रहे हैं। सीएम ने कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट के फै सले का स्वागत करते हैं। खेल संगठनों में मठाधीशों के बजाय खिलाड़ी होने चाहिए। हिमाचल सरकार भी ऐसे मामले देखेगी।
धूमल का बयान सफेद झूठ: वीरभद्र
सीएम वीरभद्र सिंह ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष प्रेमकुमार धूमल का बहुत कम लोगों को सरकारी नौकरियां मिलने का बयान सफेद झूठ है। पिछले चार साल में 47,000 लोगों को सरकारी नौकरियां मिली हैं, जबकि निजी क्षेत्र में भी 60,000 से अधिक लोगों ने नौकरी हासिल की हैं।
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डैमेज कंट्रोल, बेरोजगारी भत्ते पर सीएम ने बनाई कमेटी
बेरोजगारी भत्ता न देने के मुद्दे पर पिछले कई दिनों से अपने ही वरिष्ठ मंत्री जीएस बाली के मुखर होने पर घिरी राज्य सरकार ने बुधवार को डैमेज कंट्रोल के लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन कर लिया है।
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में ही मुख्य सचिव वीसी फारका की अध्यक्षता में कमेटी गठित करने के आदेश दिए। इस कमेटी में तीन अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल किए गए हैं।
यह कमेटी अपनी रिपोर्ट कैबिनेट की अगली बैठक में रखेगी। कमेटी सरकार की चालू कौशल विकास भत्ता योजना को बेरोजगारी भत्ते काज्यादा बेहतर विकल्प बनाने के लिए सुझाव देगी। इसके लिए बाहरी राज्यों से तथ्य भी जुटाएगी।
कैबिनेट में गूंजा बेराजगारी भत्ते का मुद्दा, सीएम ने साफ किया रुख
अपने ही वरिष्ठ मंत्री जीएस बाली की ओर से बार-बार बेरोजगारी भत्ते का मुद्दा उठाने के बाद उठे बवाल के बीच मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने आक्रामक रुख अपना लिया है। इस मुद्दे को मुख्यमंत्री ने बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में रखा।
मंत्रिमंडल के सहयोगियों के साथ बेरोजगारी भत्ते पर चर्चा की और स्थिति को भी स्पष्ट किया। इसके तत्काल बाद पत्रकार वार्ता बुलाकर मीडिया के सामने भी सरकार का रुख साफ कर दिया। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी भत्ते की जगह पिछले चार साल में हिमाचल सरकार ने 1,52,000 युवाओं को कौशल विकास भत्ता दिया है।
बेरोजगार युवाओं को प्रशिक्षण दिलाकर उन्हें पैरों पर खड़ा किया है। सीएम ने कहा कि विधवा और अपंग जैसी सामाजिक सुरक्षा पेंशन के रूप में बेरोजगारी भत्ता देना व्यावहारिक नहीं है। बाकायदा कौशल विकास भत्ते और रोजगार के आंकड़े भी मुख्यमंत्री के हवाले से श्रम एवं रोजगार मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने पेश किए।
भत्ता देने के पक्ष में है बाली, सीएम कर चुके इंकार
गौरतलब है कि पिछले दिनों से परिवहन मंत्री जीएस बाली लगातार बेरोजगारी भत्ते का मामला कैबिनेट में ले जाने को दबाव बना रहे थे। सीएम वीरभद्र सिंह ने दो दिन पहले साफ कहा था कि बेरोजगारी भत्ता देना अव्यवहारिक है।
मुख्यमंत्री कहा कि पूरी कैबिनेट बेरोजगारी भत्ते के स्थान पर कौशल विकास देने के पक्ष में है। कांग्रेस घोषणापत्र में बेरोजगारी भत्ता देने की घोषणा की भावना को ध्यान में रखकर ही इसमें संशोधन कर कौशल विकास भत्ता दिया जा रहा है।
कांग्रेस घोषणापत्र की घोषणा का सरलीकरण करते हुए दो लाख सालाना आय, 16 से 35 साल की उम्र और बारहवीं के स्थान पर आठवीं पढ़े-लिखे तथा कुछ मामलों में शैक्षणिक योग्यता की छूट देने जैसे सरल प्रावधान जोड़े गए हैं।
सामान्य बेरोजगार को ये भत्ता एक हजार रुपये और विकलांग को 1500 रुपये की दर से दे रहे हैं। कौशल विकास निगम के माध्यम से बेरोजगारों को प्रशिक्षण देने को 1140 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। हाल ही के सर्वे के मुताबिक हिमाचल में असल बेरोजगारों की संख्या तीन लाख 30 हजार है।
भाजपा के मुख्य प्रवक्ता राजीव बिंदल ने कहा कि प्रदेश सरकार और कांग्रेस पार्टी बेरोजगार युवाओं पर राजनीति कर रही है। बिंदल ने कहा कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, परिवहन मंत्री जीएस बाली, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह की ओर से सोच-समझकर रणनीति के तहत बयान दिए जा रहे हैं।
कांग्रेस पार्टी को सत्ता में रहते हुए चार साल बीत गए हैं। लेकिन युवाओं को बेरोजगारी भत्ता नहीं दिया गया। बाली कहते हैं कि सरकार के पास पैसे हैं और भत्ता दिया जा सकता है। उन्होंने सवाल किया कि बाली को चुनाव के दौरान क्यों बेरोजगारी भत्ते की याद क्यों आई?
सुखविंद्र सिंह सुक्खू कहते हैं कि चुनाव घोषणा पत्र के सभी वायदे पूरे करेंगे। भाजपा ने आरोप लगाया कि 2002-2003 में हुए आम चुनावों में कांग्रेस पार्टी ने घर-घर जाकर हर परिवार से एक को सरकारी नौकरी देने का वायदा किया था।
2003 से 2008 के माध्य केवल अपने चंद चहेतों को नौकरियां दे दीं। सरकार ने चिटों पर भर्तियां कर प्रदेश वासियों के साथ धोखा किया। 2012 में बेरोजगारी भत्ता देने के नाम पर धोखा किया। कौशल विकास भत्ते के नाम पर भारी भरकम लूट की गई, भर्तियों के नाम पर सरेआम धांधलियां की गईं। अब 2017 में कांग्रेस पार्टी व सरकार मिल कर नया षड्यंत्र रचने जा रहे हैं।