विधानसभा चुनाव के समय पार्टी हाईकमान ने उनके सुझाए उम्मीदवारों को टिकट नहीं दी। उनकी सूची में अनेक वरिष्ठ व अनुभवी नेता शामिल थे। वीरभद्र सिंह एक बार फिर हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह का नाम आने पर भड़क उठे। उन्होंने कहा कि सुक्खू अगर इतने ही महाबली हैं तो पार्टी हाईकमान उन्हें लोकसभा चुनाव में आजमा ले। वह निर्वाचित नहीं, मनोनीत अध्यक्ष हैं।
लोस चुनाव से पहले सुक्खू को हटाकर चुनाव के जरिए नया अध्यक्ष नियुक्त किया जाना चाहिए। पांच साल से अधिक समय सुक्खू को अध्यक्ष बने हो गया, उन्हें पार्टी संविधान के मुताबिक हटा देना चाहिए। उन्होंने सुक्खू पर तंज कसते हुए कहा कि सुक्खू को कुर्सी से इतना प्यार हो गया है कि वह कुर्सी छोड़ ही नहीं रहे। वीरभद्र सिंह ने यह भी साफ किया कि वह लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे।
पार्टी चुनाव को तैयार हो न हो, वह चुनाव को तैयार हैं। आगामी चुनाव को लेकर इस बार वह हाईकमान को कोई सुझाव नहीं देंगे, पार्टी जिसे भी टिकट देगी, उसके साथ झंडा उठाकर चलेंगे। पार्टी को टिकट देते समय यह देखना चाहिए कि जीतने वाला कौन है।
हारने वालों को टिकट देकर बाद में चिल्लाने से कोई फायदा नहीं। सुक्खू को हटाने के लिए वह कई बार हाईकमान को कह चुके हैं। इस दौरान उनके साथ विधायक राजेंद्र राणा, अभिषेक राणा इत्यादि मौजूद रहे।
वीरभद्र सिंह ने पीएम नरेंद्र मोदी के एक मत-एक चुनाव सिद्धांत को सिरे से खारिज कर दिया। कहा कि मोदी की लहर खत्म हो चुकी है। 2019 लोकसभा चुनाव में भाजपा को हार झेलनी पड़ेगी।
मोदी ने 2014 लोकसभा चुनाव में लोगों से जो वादे किए थे, वे आज तक पूरे नहीं हुए। लोकसभा और विधानसभा चुनाव अलग-अलग और अपने समय पर ही होने चाहिएं। वीरभद्र सिंह ने कहा कि चंडीगढ़ पर हिमाचल का कोई हक नहीं है।
संवैधानिक तौर पर देखा जाए तो एक समय था जब पंजाब की राजधानी भी शिमला हुआ करती थी, लेकिन बाद में पंजाब की राजधानी चंडीगढ़ बन गई और हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला बन गई। इस लहजे से चंडीगढ़ पर हिमाचल का कोई हक नहीं बनता।