खास बात यह है कि क्लास एक के पदों की भर्ती को प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन के माध्यम से ही किया जा सकता था। लेकिन विभाग ने विभागीय स्क्रीनिंग कमेटी की सिफारिश पर ही तीनों को नियमित कर दिया। खास बात यह है कि तीनों की सेवाओं को पांच साल का सेवा काल पूरा करने पर नियमित करने की बात कही गई।
विभागीय स्तर पर यही चूक नहीं हुई बल्कि 21 दिसंबर को 2017 को इन्हीं अस्थायी पदों को स्थायी करने की अधिसूचना भी जारी कर दी गई। हैरानी की बात यह है कि जो पद दिसंबर महीने तक स्थायी ही नहीं थे, उन पदों पर काम कर रहे अफसरों को सितंबर में ही स्थायी नियुक्ति दे दी गई।
वीरभद्र सरकार के दौरान हुए इस खेल की शिकायत अब जयराम सरकार के राज में सामने आई है। विभाग के निदेशक आरके प्रूथी ने मामले की जांच कराने की बात कही है। साथ ही कहा कि यदि नियमों को दरकिनार कर नियुक्ति की गई होगी तो उचित कार्रवाई की जाएगी।