राज्य कृषि विभाग के तहत हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना लागू की गई। इसमें सोलर फेंसिंग की जाती है। इस फेंसिंग से जंगली-जानवरों को हल्के करंट से रोका जाता है। चालू वित्त वर्ष में इस फेंसिंग में किसानों को 80 फीसदी सब्सिडी जा रही है।
ये सब्सिडी सीधे तौर पर देने के बजाय कंपनियों के माध्यम से दी जा रही है। दरअसल, कुछ कंपनियों को ही कृषि महकमे ने इसके लिए सूचीबद्ध कर रखा है। सूचीबद्ध कंपनियां किसानों से 20 प्रतिशत कृषक हिस्से की वसूली करती हैं। बाकी 80 फीसदी पैसे विभाग से सोलर फेंसिंग के बाद वसूलती हैं।
किन्नौर जिले के सांगला, पूह आदि क्षेत्रों में हमीरपुर की एक कंपनी को सोलर फेंसिंग का काम दिया गया। इस कंपनी ने किसानों से तो शेयर ले लिया, मगर सोलर फेंसिंग नहीं की।
किसानों से ये मंजूरी सोलर फेंसिंग प्रोजेक्ट मंजूर होने के बाद की गई। मंजूरी के बाद 90 दिन में सोलर फेंसिंग को पूरा करना होता है, लेकिन पांच-छह महीने पहले ही किसानों से उनके हिस्से के 22 लाख रुपये लेने के बावजूद उनके यहां सोलर फेंसिंग नहीं हो पाई है।
हिमाचल प्रदेश के कृषि विभाग के निदेशक डॉ. देसराज शर्मा का कहना है कि किसानों के लगभग 22 लाख रुपये लेकर सोलर फेंसिंग का काम नहीं करने वाली कंपनी को नोटिस जारी किया है।
नियमानुसार 90 दिन में सोलर फेंसिंग का काम पूरा करना तो दूर की बात है। इसने चार-पांच महीने के बाद भी मुड़कर नहीं देखा।
अन्य जिलों में इसके कामकाज का भुगतान रोक दिया गया है। कंपनी को मई तक सोलर फेंसिंग का काम पूरा करने को कहा गया है। यानी इसे अभी एक बार मौका दिया गया है, वरना ब्लैकलिस्ट होगी।