जब वीरभद्र ने भाषण के लिए पहले जयराम को खड़ा किया
किस्सा 2017 का है। विधानसभा चुनाव से पहले सराज के शैटाधार में नया हेलीपैड बनने और देव शैटिनाग के मंदिर की प्रतिष्ठा में सराज कांग्रेस ने सीएम वीरभद्र सिंह को बतौर मुख्यातिथि आमंत्रित किया। कांग्रेस की जनसभा में बतौर विधायक खड़े जयराम ने वीरभद्र का अपने हलके में स्वागत किया और वीरभद्र जयराम को साथ पकड़कर कांग्रेस की जनसभा में ले गए। कांग्रेस नेताओं ने भाषण की लिस्ट से जयराम का नाम काट दिया था। इस पर वीरभद्र सिंह तल्ख हुए और अपने से पहले जयराम को भाषण देने के लिए कांग्रेस की जनसभा में खड़ा कर दिया था।
आया राम, गया राम बोलने के बाद अनिल ने दिया था इस्तीफा
अक्तूबर 2017 के विधानसभा चुनाव में वीरभद्र और सुखराम एक बार फिर मंच पर आमने-सामने थे। सार्वजनिक मंच पर दोनों एक दूसरे के खिलाफ खुलकर सामने आए। तब वीरभद्र मुख्यमंत्री थे। उन्होंने सुखराम के परिवार का इतिहास गिनाते हुए उन्हें आया राम गया राम की संज्ञा दे दी। पहले से ही नाराज चल रहे सुखराम के बेटे अनिल शर्मा ने कांग्रेस के मंत्री पद से इस्तीफा देते हुए भाजपा ज्वाइन की और 2017 के चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस के मजबूत मंडी सदर के किले पर भगवा फहराया।
मंडी से जुड़ा सियासी सफर, तीन बार रहे सांसद
1967 और 1972 में वीरभद्र मंडी से चुनाव लड़कर लोकसभा पहुंचे। हालांकि, आपातकाल के बाद 1977 के लोकसभा चुनाव में वीरभद्र को हार का मुंह देखना पड़ा। उन्होंने अपनी निष्ठा नहीं बदली और इंदिरा गांधी के वफादार बने रहे। 1980 में फिर चुनाव हुए और वीरभद्र सिंह फिर जीत कर लोकसभा पहुंच गए। 1982 में इंदिरा सरकार में उन्हें उद्योग राज्य मंत्री भी बना दिया गया। 2007 में प्रदेश की सत्ता से बाहर होने के बाद वीरभद्र सिंह ने दोबारा मंडी संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ा। भारी मतों से जीतकर पांचवीं बार सांसद चुने गए। मनमोहन सिंह मंत्रिमंडल में इस्पात मंत्री बने। उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह भी दो बार मंडी संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।