पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने जब आखिरी सांस ली तो उस वक्त पुत्र विक्रमादित्य सिंह पिता के पास नहीं थे। विधायक विक्रमादित्य सिंह बुधवार को पिता वीरभद्र सिंह के लिए प्रार्थना करने कुलदेवी मां भीमाकाली के मंदिर सराहन पहुंचे थे। यहां मां भीमाकाली की संध्या आरती में पिता के स्वास्थ्य लाभ के लिए पूजा-अर्चना की। गुरुवार को उन्हें कामरु, किन्नौर जाकर देवता से प्रार्थना करनी थी। सराहन अपने महल में रुके विक्रमादित्य सिंह सुबह पिता के निधन की सूचना मिलते ही शिमला रवाना हुए।
वीरभद्र सिंह के निधन के बाद सराहन में उनकी कुल देवी मां भीमाकाली के कपाट रविवार तक बंद हो गए हैं। पातक के कारण कुलदेवी की पूजा रविवार तक बंद हो गई है। मंदिर में माता की पूजा न हो, ऐसा काफी लंबे समय बाद हो रहा है। सराहन कांग्रेस कार्यकर्ता ज्योति लाल मेहता, भानू प्रताप, राजेश लारजू, जय सिंह मेहता, हीरा लाल सोनी और उमेश आर्य ने बताया वीरभद्र सिंह जैसे इंसान और नेता की क्षतिपूर्ति करना नामुमकिन है। उन्होंने बताया कि विक्रमादित्य सिंह माता के मंदिर में पिता के लिए प्रार्थना करने सराहन पहुंचे थे। वीरवार को उनकी कामरु किन्नौर मंदिर में भी पिता के लिए पूजा अर्चना करने की योजना थी।