लेफ्टिनेंट कमांडर मेघनाथ सांगल
- फोटो : अमर उजाला
1971 पाक युद्ध के वॉर हीरो रहे वीर चक्र लेफ्टिनेंट कमांडर मेघनाथ सांगल ने दुनिया को अलविदा कह दिया है। मुंबई के खारघर में स्थित घर में उन्होंने सोमवार सुबह छह बजे अंतिम सांस ली है। मंगलवार को नेवी वेस्टर्न कमांड मुंबई की देखरेख में सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। सांगल के बेटे निरंकुश व नीरज ने उन्हें मुखाग्नि दी।
वह हिमाचल के हमीरपुर जिला के ग्राम पंचायत भटेड़ा के गांव झरेडी गांव के निवासी थे। उन्होंने सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कांगू में पढ़ाई की। वह 16 साल की उम्र में इलेक्ट्रिकल आर्टिफिशियर अप्रेंटिस के रूप में भारतीय नौसेना में शामिल हुए थे। उन्होंने वर्ष 1969 और 1970 में रूस से मिसाइल युद्ध में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया। 3 दिसंबर 1971 को भारत पाकिस्तान युद्ध में भारतीय नौसेना ने कराची बंदरगाह को नष्ट कर दिया। उनके जहाज आईएनएस निर्घाट ने मिसाइल दागकर दो विशाल जहाज शाहजहां और बाबर को नष्ट किया था।
इस मिशन में मेघनाथ सांगल का मिसाइल युद्व विशेषज्ञ के रूप में अहम योगदान रहा था, जिसके चलते उन्हें वीर चक्र से सम्मानित किया गया था। उन्हें 1972 में कमीशन के लिए चुना गया था। वह भारतीय नौसेना से कमांडर के रूप में सेवानिवृत्त हुए। वह लगभग पांच वर्षों तक सैनिक कल्याण विभाग हिमाचल प्रदेश में शिमला, किन्नौर और लाहुल स्पीति उप निदेशक रहे। वह बहुत मृदुभाषी, सौम्य और एक सामाजिक कार्यकर्ता थे। उनके तीन बेटे हैं। दो दुबई में हैं और एक मर्चेंट नेवी का कैप्टन है।
तीन दिन पहले ही विशाखापट्टनम चीफ ऑफ नेवल स्टाफ एडमिरल हरि कुमार ने मेघनाथ सांगल के नाम पर एक कॉप्लेक्स का लोर्कापण करवाया। इस लोर्कापण के लिए लेफ्टिनेंट कमांडर मेघनाथ सांगल को मुख्यातिथि के रूप में बुलाया गया था, लेकिन सेहत नासाज होने की वजह से उनके बेटे निरंकुश ने इस कॉप्लेक्स का लोर्कापण किया। इस कॉप्लेक्स नेवल स्टाफ के निवास के लिए बनाया गया है।