अब मैं इतना थक चुका हूं कि उसे उठा नहीं सकता, इसलिए अकेला ही लौट रहा हूं। मंजू के मुताबिक पीयूष को विकसित ने स्लीपिंग बैग में डालकर उठाया था। विकसित ने यह भी बताया कि जब तक पीयूष की सांसें चलतीं रहीं, वह उसे गोद में लेकर बैठा रहा। जब पीयूष की सांसें थम गईं तो उसने आगे जाने की बात कही। इस दौरान उसने बताया कि विकसित ने पीयूष के पैरों में जूतों की जगह स्लीपिंग बैग को फाड़कर बांधा। उसने आशंका जताई कि जब वह नीचे उतर रहा होगा तो रात के अंधेरे में वह गहरी खाई को भांप नहीं पाया, जिसमें गिरकर उसकी मौत हो गई होगी।
यह बात भरमौर के मंजू ने अपने फेसबुक पेज पर लाइव आकर कही। उन्होंने यह भी कहा कि जिस कुत्ते को पीयूष का बताया जा रहा है वह असल में विकसित राणा का था। उनके साथ ट्रैक पर दो कुत्ते गए थे दूसरे का पता नहीं है। असली फर्ज विकसित राणा ने निभाया, वह चाहता तो अकेला वहां से निकल कर बच सकता था, लेकिन उसने अपने ममेरे भाई को साथ लेकर आना जरूरी समझा। यदि उनका मोबाइल स्विच ऑफ नहीं होता तो शायद आज परिस्थिति कुछ ओर होती।