मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने ये कहा
इस दाैरान मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि हिमाचल हमारे के लिए सर्वोपरि है। कहा कि वे अपने पिता स्वर्गीय वीरभद्र सिंह के दिखाए रास्ते पर चल रहे हैं। जिस रास्ते पर वीरभद्र चलते थे वो पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का था, जिन्होंने वीरभद्र को प्रदेश के मुख्यमंत्री की कमान 1983 में साैंपी और उनके संकल्प व सोच को वीरभद्र सिंह ने प्रदेश में लागू करने का काम किया। विक्रमादित्य ने कहा कि हिमाचल के हर वर्ग की आवाज समय-समय पर उठाना, उनकी समस्याओं का निवारण करना और प्रदेश को विकास की दृष्टि से आगे ले जाना उनका दायित्व है। जो जिम्मेदारी उन्हें सरकार में हाईकमान, मुख्यमंत्री ने दी है, उसका निर्वहन करने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं। लगातार सड़कों के निर्माण, केंद्र से संसाधन जुटाने और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कहा, प्रदेश के लोगों के प्रति अपने सिद्धांतों पर अडिग रहना मेरी नैतिक जिम्मेदारी है। वे अपने विभाग में पूरी मजबूती से काम करने का प्रयास कर रहे हैं। प्रदेश की जनता इसे भलीभांति समझती है। मुख्यमंत्री का जो भी आदेश होगा, उसे धरातल पर उतारने का प्रयास करेंगे।
सरकार में छोटी-मोटी बातें चलती रहती हैं: प्रतिभा
इस दाैरान पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने कहा कि सरकार में छोटी-मोटी बातें चलती रहती हैं। सरकार ने कई बातें कहीं, मंत्री ने उसका जवाब दिया। इस पर ज्यादा टीका-टिप्पणी करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा, मंत्री ने अपनी बात रखी, सरकार की भी अपनी राय है, इसे बेवजह तूल देने की जरूरत नहीं है। प्रतिभा ने कहा कि विक्रमादित्य सिंह एक अनुभवी नेता हैं, वह हिमाचल की समस्याओं को भलीभांति जानते हैं। कब क्या बोलना है, क्या नहीं, इसमें वे बहुत निपुण है और खुद इस बात का जवाब देने में सक्षम हैं। हमारी सरकार ने तीन साल में जो काम किया है, सभी इससे परिचित है। हिमाचल की जनता सब जानती है। उन्होंने समर्थकों और खासतौर पर युवाओं का धन्यवाद करते हुए कहा कि उनके समर्थन से यह साफ हो गया है कि हिमाचल के हितों की लड़ाई में वे अकेले नहीं हैं।