कांग्रेस महासचिव और शिमला ग्रामीण के विधायक विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि सरकार की सत्ता संभालने के पहले दिन से प्रशासन पर पकड़ नहीं है। लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति के पहले आदेश जारी होते हैं। शपथ ग्रहण समारोह का कार्यक्रम तय कर दिया जाता है। फिर आधी रात को निर्णय पलट दिया जाता है। सरकार के इस निर्णय से एक महिला का अपमान हुआ है। पहले ही सोच-समझकर निर्णय लेना चाहिए था। जब निर्णय ले लिया तो मुख्यमंत्री को इस पर अडिग रहना चाहिए था। मुख्यमंत्री को जनता को बताना होगा कि आखिर क्यों आधी रात को निर्णय बदलना पड़ा?
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि चिट्ठियां लिखवाई जाती हैं। दबाव में पारिवारिक कारण बताकर चिट्ठी लिखवाई गई हैं। प्रदेश में बाढ़, भूस्खलन से भारी नुकसान हुआ है और मुख्यमंत्री संबंधित जिला उपायुक्तों के साथ बैठक कर राहत बचाव कार्य करने की जगह पांवटा साहिब और नाहन में पार्टी की जनसभाओं में गए हैं। सरकार बागवानों की समस्याओं का समाधान न कर दूसरी पार्टी से लोगों को लाने में व्यस्त है। जो लोग भाजपा में गए, वे वहीं से आए थे
विक्रमादित्य ने कहा कि जो लोग भाजपा में गए हैं, वे वहीं से आए थे।
कांग्रेस ने उन्हें टिकट दिया, मान-सम्मान दिया, लेकिन उन्होंने पार्टी बदली। प्रदेश में हर वर्ग सरकार की नाकामियों से परेशान है। कहा कि कांग्रेस अपने घोषणापत्र में वही दावे करेगी, जो उपलब्ध आर्थिक संसाधनों, प्रदेश पर 64,000 करोड़ के ऋण को ध्यान में रखकर पूरे हो सकें। कहा कि स्मार्ट सिटी के तहत हुए कार्य की गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों पर कांग्रेेस जांच करवाएगी। धर्मांतरण संशोधन बिल पर विक्रमादित्य ने कहा कि 2006 में बिल को कांग्रेस लाई थी। जबरन धर्मांतरण का विरोध होगा, इसमें कारण बताना अनिवार्य होगा। गरीब लोगों का इसमें निशाना बनाया जाता है।बिल का कांग्रेस इसलिए समर्थन करती है।