कोरोना योद्धाओं के लिए मास्क, ग्लव्ज, थर्मल स्कैनर और पीपीई किट जैसे उपकरणों की खरीद की पेमेंट रिलीज करने के लिए पांच लाख के लेनदेन से जुड़े वायरल ऑडियो की जांच में जुटी विजिलेंस को अहम सुबूत मिले हैं। अब तक की जांच में स्वास्थ्य विभाग के पूर्व निदेशक डॉ. अजय कुमार गुप्ता और सामान सप्लाई के दौरान एजेंट की भूमिका निभाने वाले शख्स के दावे गलत साबित हो रहे हैं। दोनों ने ऑडियो में अपनी आवाज को तो स्वीकारा, लेकिन पैसे का लेनदेन न होने का दावा किया था।
उधर, विजिलेंस के सूत्रों का कहना है कि टीम के हाथ कुछ ऐसे तथ्य लगे हैं, जिनसे दोनों के लेनदेन न होने के दावे झूठे साबित हो रहे हैं। दोनों से अलग-अलग और आमने-सामने पूछताछ शुरू की है। विभिन्न जगह के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और दोनों के मोबाइल फोन कॉल डिटेल और मोबाइल लोकेशन ट्रैक किए जा रहे हैं। दोनों की लोकेशन कई बार एक साथ होने की जानकारी मिली है। जांच में सामने आया है कि डील उसी दिन हुई, जिस दिन फोन पर रिकॉर्डिंग की गई। ऐसे में अब विजिलेंस दोनों की मुलाकात के स्थान और डील को लेकर छानबीन में जुटी है।