परिवहन विभाग के प्रस्ताव के अनुसार सभी बस अड्डों के प्रवेश और निकास द्वारों पर स्वास्थ्य जांच, स्क्रीनिंग और कानून व्यवस्था बनाना सुनिश्चित किया जाएगा। बस अड्डे पर एक प्रवेश द्वार से सिर्फ यात्रियों को आने ही अनुमति दी जाएगी। बस अड्डों में सभी जरूरी भागों को हर दो घंटे बाद सैनिटाइज किया जाएगा। प्रत्येक शौचालय में साबुन मशीन जरूरी है।
एचआरटीसी के क्षेत्रीय प्रबंधक सभी बस अड्डों पर मास्क, हैंड सैनिटाइजर, साबुन आदि की उपलब्धता सुनिश्चित करेंगे। इनके दाम बस अड्डा प्रबंधन एवं विकास प्राधिकरण रेगुलेट करेगा। बस अड्डों पर सार्वजनिक घोषणा प्रणाली के माध्यम से यात्रियों को लगातार यात्रा के समय बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में जानकारी दी जाएगी।
बसों में चढ़ते और उतरते समय कम से कम एक मीटर की दूरी को सुनिश्चित करना होगा। टिकट जारी करते समय परिचालक को जरूरी सावधानी बरतनी होगी। चालक-परिचालक को मास्क पहनने के आलावा हाथ में ग्लव्स लगाने होंगे। वरिष्ठ नागरिकों, गर्भवती महिलाओं, 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चों और गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों को अति आवश्यक होने पर ही यात्रा करनी होगी।
हिमाचल में एक जून से एचआरटीसी की बसों के साथ निजी बसें भी सड़कों पर दौड़ेंगी। परिवहन मंत्री गोंविद सिंह ठाकुर की निजी बस संचालक संघ के साथ हुई बैठक में यह फैसला लिया गया है। निजी संचालकों का हर सप्ताह घाटे का आकलन होगा। अगर घाटा होता है तो सरकार इसे वहन करने पर विचार कर सकती है। मंत्री व निजी बस संचालकों के बीच करीब तीन घंटे हुई इस बैठक में विभिन्न मांगों पर चर्चा हुई, जिससे परिवहन मंत्री ने निजी बस संचालकों को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के समक्ष रखा जाएगा।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि सरकार प्रदेश के सभी निजी बस संचालकों पर बसें चलाने के लिए कोई दवाब नहीं बनाएगी। प्रदेश जिन बस संचालक के पास बसों को चलाने के लिए पैसे नहीं है या अन्य कोई समस्या है तो बसें न चलाएं। लेकिन अन्य संचालक जो बसों को चलाने में सक्षम हैं वे बसें चलाएं ताकि इस संकट की घड़ी में लोगों को सुरक्षित परिवहन सेवा मिल सके।