लंबी जद्दोजहद के बाद आखिरकार विजिलेंस ने ब्रैकल कॉरपोरेशन के खिलाफ फर्जी दस्तावेजों की मदद से प्रोजेक्ट हासिल कर धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है। पिछले शुक्रवार को सरकार से मंजूरी मिलने के बाद कानूनी विचार-विमर्श के बाद शनिवार देररात मामले में एफआईआर दर्ज की गई। मामले में ब्रैकल कॉरपोरेशन के तत्कालीन प्रबंधन को नामजद किया गया है।
मामला दर्ज करने के साथ ही ब्यूरो ने इसकी जांच स्पेशल इन्वेस्टिगेशन यूनिट को दे दी है। रविवार से जांच अधिकारी पूछताछ शुरू कर देंगे। बता दें कि किन्नौर में 960 मेगावाट का जंगी थोपन बिजली प्रोजेक्ट दिसंबर 2006 में ब्रैकल को आवंटित हुआ था। 2009 में ब्रैकल से प्रोजेक्ट वापस ले लिया। इसके बाद लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद जयराम सरकार ने उसे 260 करोड़ रुपये का अपफ्रंट प्रीमियम लौटाने से इंकार कर दिया।
इस प्रीमियम का कुछ हिस्सा अडानी कंपनी ने भी सरकार को जमा किया था। हालांकि सरकार ने अडानी की ब्रैकल के साथ कोई भी सांठगांठ को मान्यता नहीं दी थी, जिसके बाद अडानी को प्रोजेक्ट नहीं मिल सका। फिलहाल जयराम सरकार ने प्रोजेक्ट एसजेवीएनएल को देने का फैसला लिया है।