नगर परिषद सोलन में नियुक्तियों में गड़बड़ी के आरोपों से घिरे वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष डा. राजीव बिंदल को राहत देने की तैयारी है। लंबी जद्दोजहद के बाद आखिरकार जयराम सरकार की मंजूरी मिलते ही विजिलेंस ने साल 2006-07 में दर्ज मामले से बिंदल का नाम वापस लेने के लिए सोलन कोर्ट में आवेदन कर दिया है। अब कोर्ट इस पर फैसला लेगा।
बिंदल के खिलाफ 2002-2007 की वीरभद्र सरकार के कार्यकाल के दौरान सोलन नगर परिषद में भर्ती घोटाले का मामला दर्ज किया था। आरोप है कि बिंदल के सोलन नगर परिषद का अध्यक्ष रहते भर्तियां में भारी अनियमितता हुईं। विजिलेंस ने मामला तो दर्ज कर लिया, लेकिन 2007 में प्रदेश में धूमल के नेतृत्व वाली भाजपा की सरकार आ गई।
इस सरकार में बिंदल मंत्री बने, लेकिन धूमल सरकार ने केस वापस नहीं लिया। वर्ष 2012 में वीरभद्र सरकार के दोबारा सत्तासीन होने के बाद कोर्ट में बिंदल समेत 27 आरोपियों के खिलाफ आरोप भी तय हो गए। दिसंबर 2017 में भाजपा फिर सत्तासीन हो गई।
सरकार गठन के बाद से ही बिंदल के नाम वापस लेने को लेकर विधि और गृह विभाग के बीच फाइल घूम रही थी। आखिरकार गृह विभाग की मंजूरी मिलते ही विजिलेंस ने शुक्रवार को कोर्ट में नाम वापसी के लिए आवेदन कर दिया।