हिमाचल की बेटी का तैयार चूल्हा अब बाजार में उतरेगा। चूल्हे का बाकायदा पेटेंट होगा। देश की एक बड़ी कंपनी ने इस चूल्हे को बाजार में लांच करने की इच्छा भी जता दी है। देश की राजधानी दिल्ली में 4 से 8 दिसंबर तक पहला इंडियन इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल हुआ। इसमें काइस स्कूल की दो छात्राओं लीना और विदुषी ने हिमाचल का प्रतिनिधित्व किया।
इस साइंस फेस्टिवल में देश और विदेश से लगभग 4000 मॉडल प्रदर्शित किए गए। केंद्रीय विज्ञान मंत्री डॉ. हर्षवर्धन विदुषी के मॉडल से प्रभावित हुए। विदुषी ने ग्रामीण लोगों के लिए ऐसे चूल्हे का निर्माण किया है। जो ईंधन की कम खपत करता है। इसमें खाना भी जल्दी पकता है। इसके साथ ही यह चूल्हा धुएं में से हानिकारक गैसों को कम करने में सहायता करता है।
हर्षवर्धन बोले, चूल्हा ग्रामीण भारत के लिए वरदान
हर्षवर्धन ने कहा कि यह चूल्हा ग्रामीण भारत के लिए वरदान हो सकता है। उन्होंने गाइड अध्यापक पंकज वर्मा को दिल्ली में कार्यरत डॉ विरेंद्र कुमार विजय जो सेंटर फॉर रूरल डेवलपमेंट एंड टेक्नोलॉजी के प्रोफेसर और हेड के साथ इस मॉडल पर कार्य करने की सलाह दी ताकि इसे पेटेंट करवा कर बाजार में लोगों के लिए उपलब्ध करवाया जा सके।
इसके अलावा इसी क्षेत्र में कार्य करने वाली कंपनी ने इस चूल्हे को बाजार में लांच करने की इच्छा जाहिर की है। काईस स्कूल की प्रधानाचार्य कमला ने कहा कि यह विद्यालय के लिए अभूतपूर्व सफलता है। छात्राओं का स्कूल में जोरदार स्वागत किया जाएगा।
ये हैं इस चूल्हे की खासियत
काईस स्कूल की छात्रा द्वारा बनाया गया यह उन्नत बहुउदे्शीय चूल्हा है। यह चूल्हा तंदूर के आकार का है। चूल्हा तीन भागों में बांटा गया है। यह दूसरे चूल्हों के मुकाबले 30 फीसदी कम इंधन खर्च करता है। इसके अलावा इसमें दूसरी कई खूबियां भी है। इसकी लागत करीब 1800 से 2000 रुपये तक है।
बिदुषी ने बताया कि उसे साइंस टीचर पंकज से इस मॉडल को तैयार करने की प्रेरणा मिली। बिदुषी ने गांव-गांव में जाकर सर्वेक्षण किया। बिदुषी ने इस चूल्हे में जाली, चूना और फिल्टर लगाया है। बिदुषी नौवीं कक्षा की छात्रा है। विदुषी के पिता कन्हैया लाल सेऊबाग किसान हैं। विदुषी ने कहा कि उसे अपनी चारों बहनों रीता, निशा शिवानी प्रियापाल भव्या से भी काफी सहयोग मिला।