भाजपा के विरोध के बावजूद हिमाचल विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक 2014 विधानसभा में ध्वनि मत से पारित हो गया। इससे नई भर्तियों, भर्ती नियमों और अन्य वित्तीय मामलों में फैसला लेने के विश्वविद्यालय के अधिकार सीमित हो गए। इस संशोधन से विवि में वित्त कमेटी कार्यकारी परिषद यानी ईसी से भी ताकतवर होने जा रही है और वित्त या शिक्षा सचिवों के प्रतिनिधियों को ईसी की बैठक में आने से कुलपति भी नहीं रोक सकेंगे।
हालांकि, विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने साफ किया कि ऐसी कई घटनाएं हुई हैं कि वित्त सचिव के प्रतिनिधि को ईसी की बैठक में बैठने नहीं दिया गया और बैठक में लिए गए फैसलों के कारण सरकार पर करोड़ों का बोझ पड़ा। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह प्रदेश विवि की स्वायत्तता के पक्षधर हैं और अकादमिक मसलों पर सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं है। इस संशोधन से विवि अधिनियम की धारा 21 और 28 में संशोधन किया गया है।