सिटिंग विधायकों पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और पूर्व मंत्री नरेंद्र बरागटा के देहांत पर सोमवार को सदन गमगीन हुआ। हिमाचल प्रदेश विधानसभा मानसून सत्र के पहले दिन वीरभद्र सिंह, नरेंद्र बरागटा के अलावा अमर सिंह चौधरी, राम सिंह और मोहन लाल के देहांत के शोक प्रस्ताव सदन में रखे गए। सदन की कार्यवाही में करीब चार घंटे तक शोकोद्गार ही व्यक्त किए गए। इसी के साथ सदन की बैठक दूसरे दिन लिए स्थगित कर दी गई।
दोपहर बाद दो बजे हिमाचल प्रदेश की तेरहवीं विधानसभा का यह बारहवां सत्र राष्ट्रगान के साथ शुरू हुआ। सदन की कार्यवाही के शुरू होते ही विधानसभा अध्यक्ष विपिन सिंह परमार ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के सभी विधायकों से सहयोग की अपील की। इसके बाद मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने शोकोद्गार प्रस्ताव रखे। उन्होंने इस प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए पिछले बजट सत्र और इस मानसून सत्र के बीच वीरभद्र सिंह, नरेंद्र बरागटा, अमर सिंह चौधरी, राम सिंह और मोहन लाल के देहावसान पर शोक प्रस्ताव रखा।
जयराम ठाकुर ने इस बीच कोरोना के कारण प्रदेश में बहुत से लोगों की जान जाने पर भी दुख व्यक्त किया। उन्होंने हाल ही में बाढ़ से हुई क्षति पर भी अफसोस जताया। शोकोद्गार प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के बाद नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने भी चर्चा में भाग लिया। संसदीय कार्य मंत्री सुरेश भारद्वाज, डॉ. राजीव बिंदल, धनीराम शांडिल, आशा कुमारी, सुखविंद्र सिंह सुक्खू, विक्रमादित्य सिंह, राकेश सिंघा, कमलेश कुमारी आदि विधायकों के अलावा विधानसभा उपाध्यक्ष हंसराज ने भी शोक प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लिया।
अग्निहोत्री ने सदन में उठाई रिज पर वीरभद्र की आदमकद प्रतिमा लगाने की मांग
नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने शोकोद्गार प्रस्ताव के दौरान चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि उनके आवास हॉलीलॉज शिमला में तो कोई भी बिना समय मांगे मिल सकता था। उन्होंने एक बार की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि नालागढ़ से दो लड़कियां रोते हुए आईं, उनके पास फीस नहीं थी। वीरभद्र ने निजी अकाउंट से एक को नर्सिंग की फीस दिलाई। दूसरी की निदेशक से फीस माफ करवाई। अखंड राजयोग के व्यक्तित्व दुर्लभ ही मिलते हैं। मुकेश ने सरकार से मांग की कि वीरभद्र सिंह की आदमकद की प्रतिमा रिज मैदान पर लगाएं। मंत्रिमंडल में फैसले लें।