प्रशासनिक सुधार, राष्ट्रीय सुरक्षा और सांविधानिक शासन भी चर्चा के मुख्य बिंदु होंगे। लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ बनाने में सरदार पटेल की भूमिका पर भी विचार किया जाएगा। भारत के अलावा जर्मनी, अमेरिका और बुल्गारिया के विश्वविद्यालयों से जुड़े विद्वान डिजिटल माध्यम से व्याख्यान देंगे।विभिन्न सत्रों में हैदराबाद, कश्मीर, पंजाब की पहाड़ी रियासतों और ओडिशा के एकीकरण पर विमर्श होगा। भारतीय सिविल सेवा की स्थापना, राजकोषीय संघवाद और सांविधानिक विकास पर भी चर्चा होगी। प्रशासनिक दक्षता और समकालीन संघीय लोकतंत्र की चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। उद्घाटन समारोह में कई अकादमिक प्रकाशनों का लोकार्पण भी होगा। इनमें ‘वंदे मातरम् : एक यात्रा’ सचित्र पुस्तक शामिल है। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन पर आधारित संगोष्ठी कार्यवाही और बहुभाषी कविता संग्रह का भी लोकार्पण होगा।