हिमाचल के मंडी जिले के संधोल में तैनात एक पशु चिकित्सक ने पशुपालन विभाग के निदेशक, पूर्व निदेशक और उपनिदेशक मंडी समेत करीब 14 अफसरों पर धोखाधड़ी, जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल समेत कई संगीन आरोप लगाए हैं। पुलिस ने शिकायत पर धारा 419,420 और 3(एस)(आर) के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस को सौंपी शिकायत में पशु चिकित्सक विनोद कुमार ने सरकारी कर्मचारी को धमकाने, अनुसूचित जनजातीय शब्दों का इस्तेमाल कर उन्हें अपमानित करने, झूठे मामलों में फंसाने, सरकार के उच्च अधिकारियों और हाईकोर्ट को जाली दस्तावेजों, झूठे बयानों, जाली साक्ष्यों और गलत सूचना देकर उन्हें मानसिक, शारीरिक और आर्थिक नुकसान पहुंचाने, गलत तथ्यों एवं गलत सूचना के आधार पर सार्वजनिक तौर पर उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने जैसे आरोप लगाए हैं।
डीएसपी चंद्रपाल सिंह ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। शिकायतकर्ता मूल रूप से तंदुप जिला किन्नौर का रहने वाला है। पुलिस को सौंपी शिकायत में उसने दावा किया है कि वह अनुसूचित जनजाति वर्ग का मंडी जिले में अपने विभाग में अकेला अधिकारी है। उसे अधिकारियों की ओर से पिछले चार साल से कई तरह से प्रताड़ित किया जा रहा है, जबकि तीन घोटालों के गलत दस्तावेज बनाने का आदेश देते हुए उच्चाधिकारियों ने उसे मानसिक रूप से परेशान किया है।
शिकायत में इन अधिकारियों को किया नामजद
शिकायतकर्ता ने वर्तमान निदेशक पशुपालन विभाग डॉ. अजमेर सिंह डोगरा, तत्कालीन पशुपालन निदेशक डॉ. स्वधेश कुमार चौधरी, वर्तमान उपनिदेशक पशु स्वास्थ्य एवं प्रजनन मंडी डॉ. विशाल शर्मा, सहायक निदेशक रोग अन्वेषण प्रयोगशाला खलियार डॉ. शिव कुमार शर्मा समेत 14 अधिकारियों और अन्य पर आपराधिक मामले दर्ज करने की गुहार लगाई है।